भारतीय जनता पार्टी ने शहर के साथ साथ देहात में भी जबरदस्त जीत दर्ज की है। शहरी लोगों ने भाजपा पर एक फिर भरोसा जताया है। विधानसभा चुनाव के चार सालों के बाद भी भाजपा का रुतबा बरकरार रहा। कांग्रेस की हालत चार साल पहले के जैसे ही रही। जिसका वोट बैंक निर्दलियों से भी कम रहा है।
जम्मू जिले की 7 म्यूनिसिपल कमेटी की कुल 79 वार्ड हैं। इनमें से अकेले भाजपा ने 48 पर कब्जा जमाया। जबकि कांग्रेस को मात्र 14 सीटें मिली हैं। निर्दलीय उम्मीदवारों ने 17 सीट हासिल की हैं। इन 7 म्यूनिसिपल कमेटियों में आरएस पुरा की 13, ज्यौड़ियां 7, खौड़ 13, घो मन्हासा 7, अखनूर 13, अरनिया 13 और बिश्नाह 13 शामिल हैं। नतीजों से साफ है कि इन 7 म्यूनिसिपल कमेटी में चार 4 जगहों पर भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला है। यहां वो अपना चेयरमैन बनाएगी। बिश्नाह और अरनिया में भी भाजपा के चेयरमैन बन सकते हैं। यहां उसे चेयरमैन बनाने के लिए किसी एक निर्दलीय की आवश्यकता पड़ेगी।
पहली बार आरएस पुरा में अपने दम पर भाजपा चुनेगी चेयरमैन, 13 वार्ड में से 9 पर भाजपा की झोली में
आरएस पुरा में पहली बार भारतीय जनता पार्टी अपने अकेले दम पर म्यूनिसिपल कमेटी का चेयरमैन चुनेगी। आरएस पुरा की 13 वार्ड में से 9 पर भाजपा ने जीत दर्ज की है। कांग्रेस को मात्र 1 सीट से संतुष्ट रहना पड़ा है। जबकि 3 आजाद उम्मीदवारों ने जीत का परचम लहराया है।
कमेटी का चेयरमैन बनने के लिए 7 सदस्यों का होना जरूरी है। पिछले चुनाव में भाजपा के पास सिर्फ तीन ही सीट थीं। अब तक चेयरमैन बनने के लिए जोड़ तोड़ होती आई है। लेकिन इस साल भाजपा अकेले ही अपना चेयरमैन चुन सकती है। इसके लिए जोड़ तोड़ शुरू हो गई है। भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने आरएस पुरा में जमकर प्रचार किया। सुचेतगढ़ के विधायक चौधरी शाम ने अपने विधानसभा हल्के के अलावा आरएस पुरा में जमकर प्रचार किया और भाजपा को विजय बनाया।
अखनूर में भी हाथ पर भारी पड़ा कमल का फूल, 13 में से 11 सीटों पर भाजपा का कब्जा
अखनूर में भी भारतीय जनता पार्टी ने जीत का परचम फहराया है। कांग्रेस भाजपा को यहां भी चुनौती देने में नाकाम रही। जबकि कांग्रेस के अखनूर से दो बार शाम लाल शर्मा विधायक रहे हैं। वह दो बार मंत्री भी रहे। उनके भाई मदन लाल शर्मा सांसद रह चुके हैं। बावजूद इसके कांग्रेस अखनूर में औंधे मुंह गिरी है।
अखनूर में कुल 13 वार्डों के लिए वोट पड़े थे। इनमें से अकेले भाजपा ने 11 पर कब्जा जमाया। कांग्रेस को सिर्फ 2 ही सीटें मिलीं। निर्दलीय भी यहां कोई उम्मीदवार नहीं जीत सका। माना जा रहा था कि भाजपा को अखनूर में कांग्रेस से कड़ी चुनौती मिलेगी, लेकिन शहरी वोटरों का दिल जीत पाने में कांग्रेस नाकाम रही, जबकि भाजपा ने लोगों का भरोसा कायम रखा। अखनूर में भी पहली बार भाजपा अपने अकेले दम पर चेयरमैन बनाएगी।
घो मनासा में चला कमल का जादू
शहर के बाहरी क्षेत्र घो मनासा में भी कमल का जादू चला है। यहां 7 सीटों में से भाजपा ने पांच पर जीत दर्ज की है। यहां निर्दलीय कोई नहीं जीत सका। घो मनासा में भी पहली बार भाजपा को इतनी सीटें मिलीं। यहां कांग्रेस कोई कमाल नहीं कर सकी। पैंथर्स पार्टी का यहां खाता नहीं खुल सका।
ज्यौड़ियां ने बचाई कांग्रेस की लाज, 7 में से 4 सीटों पर जीत दर्ज की
हर जगह मुंह की खाने वाली कांग्रेस को ज्यौड़ियां ने कुछ राहत की सांस दी है। ज्यौड़ियां में कांग्रेस ने 7 में से चार सीटों पर जीत दर्ज की है। भाजपा को यहां 2 सीटों पर ही संतुष्ट रहना पड़ा। एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। ज्यौड़ियां के नतीजों ने कांग्रेस के खेमे में कुछ खुशी पैदा की है। यहां चेयरमैन बनने के लिए चार सीटों की आवश्यकता थी। कांग्रेस यहां बहुमत में है।