कोविड की चुनौतियों के बीच कठिन परिश्रम और दृढ़ता से 12वीं की बोर्ड परीक्षा में टॉप फाइव रैंक पाने वाले मेधावियों का मेला वीरवार को स्कॉस्ट जम्मू में अमर उजाला के मेधावी छात्र सम्मान समारोह में लगा। जम्मू संभाग के विभिन्न जिलों से पहुंचे मेधावियों ने भविष्य को लेकर अपनी तैयारियां और बोर्ड परीक्षा के दौरान अपने अनुभवों को सांझा किया। कहा उन्होंने किस्मत को नहीं, मेहनत को अपना सच्चा साथी माना है। हमारे सफर का आगाज ही सम्मान के साथ हुआ है, ऐसे हमारी खुद के प्रति जिम्मेदारी और बढ़ गई है।
अमर उजाला मेधावी छात्र सम्मान: 12वीं के विद्यार्थी बोले- किस्मत नहीं, मेहनत को माना सच्चा साथी
स्कॉस्ट जम्मू में अमर उजाला के मेधावी छात्र सम्मान समारोह में लगा। जम्मू संभाग के विभिन्न जिलों से पहुंचे मेधावियों ने भविष्य को लेकर अपनी तैयारियां और बोर्ड परीक्षा के दौरान अपने अनुभवों को सांझा किया।
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सतवारी के गाडीगढ़ की निवासी गजल प्रीत कौर ने 12वीं कॉमर्स संकाय में चौथा रैंक हासिल किया है। उन्होंने कहा कि पहली बार इस तरह का सम्मान मिल रहा है। इससे भविष्य और अच्छा करने की प्रेरणा मिलती है। परिवार वाले मुझे सम्मानित होते देख गौरव महसूस कर रहे हैं। परिवार की तरफ हमेशा सहयोग मिल रहा है। उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए हमेशा परिश्रम को अपना सच्चा साथी मानूंगी।
शहर के ग्रेटर कैलाश की रहने वाली अंचल वर्मा ने साइंस संकाय में तीसरा रैंक हासिल किया है। अंचल ने कहा कि जब आप परिश्रम को सराहते हैं तो उससे खुशी के साथ प्रेरणा भी मिलती है। आज बेटियां हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं। मैरा लक्ष्य आईएएस बनना है। बोर्ड परीक्षा में किसी शॉर्ट कट के बजाय हमेशा परिश्रम को महत्व दिया है, जो आगे भी रहेगा।
राजौरी जिले के दूरदराज गांव चिंगस की निवासी हर्षित शर्मा ने कहा कि सम्मानित होना मेरे लिए तो खास है ही, लेकिन गांव के अन्य बच्चे व युवा भी इसे प्रेरणा के रूप में लें। भविष्य में वे भी इस तरह का सम्मान हासिल करें और इसके लिए परिश्रम करेंगे। राजौरी जिला सुविधाओं के हिसाब से काफी पिछड़ा है, लेकिन वहां बच्चे शिक्षा के महत्व को समझते हैं। मैरा सपना आईएएस अधिकारी बनने का है, जिसका रास्ता परिश्रम ही है।
श्री माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी से बीटेक कर रहीं छन्नी हिम्मत की सानिया महाजन ने साइंस संकाय में पांचवां रैंक हासिल किया है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के बच्चों में प्रतिभा की कमी नहीं है। शिक्षा, खेल या फिर कोई भी क्षेत्र हो हम हर जगह अपना परचम लहरा रहे हैं। उप राज्यपाल से सम्मानित होना गर्व की बात है। माता-पिता को भी लगता है की उनके बच्चे अच्छा कर रहे हैं। इंजीनियर बनकर देश के निर्माण में अपना योगदान देना लक्ष्य है।
कठुआ के दियाला चक के शिवम शर्मा केंद्रीय विवि से रसायन विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोविड की चुनौतियों के बीच परीक्षा की तैयारी की थी। चुनौती मुश्किल थी, लेकिन हौसला बुलंद रखा था। हमेशा से पढ़ाई को महत्व दिया। जिस विषय को पकड़ा उसे पूरा किया, बीच में कभी नहीं छोड़ा। मेरे स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे भी इस सम्मान से प्रेरित होंगे, उन्हें भी अच्छा करने की प्रेरणा मिलेगी।
साइंस संकाय में पांचवां स्थान पाने वाले कठुआ जिले के राजबाग के कुंवरपाल सिंह ने कहा कि परिवार में सब मुझसे बड़े हैं और सभी सीबीएसई बोर्ड से पढ़े हैं। सभी अपने समय में टॉपर रहे हैं। ऐसे में मेरे लिए बोर्ड की मेरिट लिस्ट में आना चुनौती थी। 12वीं कक्षा में शुरूआत से पढ़ाई पूरी निरंतरता से शुरू की थी, जिसका अच्छा परिणाम मिला है। एलजी से सम्मानित होना अपने आप में बड़ी बात है। अमर उजाला कार्यालय से सम्मानित करने के लिए फोन आने पर पूरा परिवार खुश था।
आठवीं कक्षा से देखा डॉक्टर बनने का सपना, एमबीबीएस के लिए चयन होने से हुआ सच
डॉक्टर की समाज के प्रति जिम्मेदारी और सेवा देखकर आठवीं कक्षा से डॉक्टर बनने का सपना संजोए पलक मरहत्ता का सपना एमबीबीएस के लिए चयन होने से सच साबित हुआ है। कश्मीर से विस्थापित परिवार की बेटी पलक राजकीय मेडिकल कॉलेज जम्मू में डॉक्टर की पढ़ाई करेंगी और स्वास्थ्य समाज के निर्माण में अपना योगदान देंगी। वीरवार को पलक को अमर उजाला के मेधावी छात्र सम्मान समारोह से सम्मानित किया गया।
जम्मू शहर के सुभाष नगर की पलक ने साइंस संकाय में 99 फीसदी अंक हासिल कर चौथा रैंक पाया है। पलक ने बताया कि इस तरह का सम्मान प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा, दसवीं से 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल रिहाड़ी में की। आठवीं से डॉक्टर बनने का सपना देख था। पापा निजी कंपनी में अकाउंटेट की नौकरी करते हैं। डॉक्टर बनने का सपना तो मेरा था, लेकिन उसे सच करने में पापा का योगदान सबसे ज्यादा है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर को आज भी लोग भगवान का दूसरा रूप मानते हैं। किसी का जीवन बचाना शायद इस दुनिया में सबसे अच्छा काम होगा। नीट की तैयारी आठवीं कक्षा से शुरू कर दी थी। स्कूल, कोचिंग और खुद से तैयारी कर सफलता हासिल की। अमर उजाला से मिला सम्मान मुझे डॉक्टर की पढ़ाई में अच्छा करने के लिए प्रेरित करेगा।