कर्नल पंजाब सिंह (सेवानिवृत्त) का 79 वर्ष की आयु में कमांड अस्पताल में निधन हो गया है। हाल ही में वह कोरोना को मात देकर स्वस्थ हुए थे। लेकिन पोस्ट कोविड दिक्कतों के चलते उन्होंने दम तोड़ दिया। इसकी जानकारी सैन्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल देवेंद्र आनंद ने दी। उनका जन्म 15 फरवरी 1942 को हुआ था। उन्हें 16 दिसंबर 1967 को सिख रेजिमेंट की 6वीं बटालियन में नियुक्त किया गया था। उन्होंने 12 अक्तूबर 1986 से 29 जुलाई 1990 तक प्रतिष्ठित बटालियन की कमान संभाली। वह 1971 के युद्ध में हुई पुंछ की लड़ाई के नायक रहे हैं। उनकी वीरता के किस्से आज भी याद किए जाते हैं।
बता दें कि 1971 की जंग में एक अहम लड़ाई पुंछ के पहाड़ों पर लड़ी गई थी। जिसमें दुश्मन ने पुंछ पर कब्जा करने की नापाक साजिश रची थी। पाकिस्तान के सैनिकों की संख्या अधिक होने के बावजूद भारतीय सेना की 6वीं सिख बटालियन के जांबाजों ने दुश्मन के मंसूबे नाकाम कर दिए। इस लड़ाई के वह नायक थे।
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कर्नल पंजाब सिंह (सेवानिवृत्त)
- फोटो : भारतीय सेना
ऑपरेशन कैक्टस लिली के नायक थे कर्नल पंजाब सिंह
1971 के युद्ध के दौरान ऑपरेशन कैक्टस लिली में बटालियन के जवानों ने पुंछ की दुर्गम चोटियों पर 13 किलोमीटर एरिया में कब्जा किया। इसके साथ ही पाकिस्तान को वहां घुसने में नाकाम किया। यह इलाका सामरिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। यहां दो सामरिक महत्व के पॉइंट्स हैं। अगर दुश्मन अपने नापाक मंसूबों में कामयाब हो जाता तो वह पुंछ को अपने कब्जे में ले सकता था।
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कर्नल पंजाब सिंह (सेवानिवृत्त)
- फोटो : भारतीय सेना
दुश्मन ने तीन दिसंबर 1971 को हमला किया। कर्नल पंजाब सिंह( (तत्कालीन मेजर) ने अपनी जान की परवाह किए बगैर कदम बढ़ाया और यह सुनिश्चित किया कि उनके आदेश के तहत सभी जवान तब तक हमला करेंगे जब तक कि हमलावर बल पीछे न हट जाए।
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1971 के युद्ध के दौरान भारतीय सेना
- फोटो : Twitter@adgpi
सेवानिवृत्ति के बाद कर्नल पंजाब सिंह सैनिक कल्याण, हिमाचल प्रदेश के निदेशक थे। वह इंडियन एक्स सर्विस लीग, हिमाचल प्रदेश के दक्षिणी क्षेत्र के उपाध्यक्ष भी रहे। लोकप्रिय, अनुभवी नायक के रूप में उन्होंने युवा अधिकारियों की एक पीढ़ी को प्रेरित करना जारी रखा।
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1971 के युद्ध के दौरान भारतीय सेना
- फोटो : भारतीय सेना
सैन्य प्रवक्ता ने कहा कि वह अपने पीछे एक बहादुर सैनिक और एक सज्जन व्यक्ति की गौरवशाली विरासत छोड़ गए हैं।