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जिन्होंने देश की खातिर पाक के पूर्व जनरल राहिल शरीफ के भाई को किया था ढेर, पढ़ें वीरता की कहानी

Sun, 16 Dec 2018 02:35 AM IST
विक्रांत चतुर्वेदी न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: विक्रांत चतुर्वेदी Updated Sun, 16 Dec 2018 02:35 AM IST
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16 december 1971: Indian martyr who killed brother of pak army chief rahil l sharif
Kargil Vijay Diwas - फोटो : अमर उजाला
जम्मू कश्मीर के उधमपुर जिले के क्रिमची गांव में सूबेदार करतार सिंह के घर 19 अगस्त 1936 को जन्मे मेजर नारायण सिंह(वीर चक्र) ने भारत-पाकिस्तान(1971) की लड़ाई में न सिर्फ अपने पराक्रम का परिचय दिया, बल्कि दुश्मन को धूल चटाते हुए ऐसा दर्द दिया, जिसे वह आज भी लोहा मानता है।

 
16 december 1971: Indian martyr who killed brother of pak army chief rahil l sharif
1971 का भारत पाक युद्ध
मशहूर पाकिस्तानी जनरल मुकीम खान ने अपनी पुस्तक ‘पाकिस्तान क्राइसिस आफ लीडरशिप’ में इस वीर शहीद के बारे में कुछ यूं लिखा है, हमारे ऊपर इस युद्ध में सबसे कड़ा और निर्णायक आक्रमण मेजर नारायण सिंह की कमान में 4 जाट द्वारा किया गया था। 
16 december 1971: Indian martyr who killed brother of pak army chief rahil l sharif
Rahil Sharif - फोटो : File Photo
उसने हमारी 6 एफएफ की चौकियों पर बहादुरी और हिम्मत से थोड़े से सैनिकों के साथ अंदर घुस कर घातक वार किया और अंत में लड़ता हुआ शहीद हो गया। जनरल मुकीम खान ने पुस्तक में फाजिल्का की लड़ाई का जिक्र करते हुए लिखा है कि शहीद मेजर नारायण सिंह ने निशाने हैदर मेजर शब्बीर शरीफ (पाकिस्तान के हाल में सेवानिवृत्त जनरल राहील शरीफ के बड़े भाई) जो उस समय 6 एफएफ की कमान संभाले थे, उन्हें पांच दिसंबर 1971 में गुत्थम गुत्था की लड़ाई में मार गिराया था। 
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16 december 1971: Indian martyr who killed brother of pak army chief rahil l sharif
war
इस दौरान वह खुद भी शहीद हो गए थे। यह लड़ाई फाजिल्का की वेरीवाल नदी के किनारे लड़ी गई। इसलिए यह वार आफ वेरिवाला के नाम से भी जानी जाती है। इसे वार आफ मेजरस भी कहा जाता है, क्योंकि यह दो मेजरों के बीच लड़ी गई थी।
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16 december 1971: Indian martyr who killed brother of pak army chief rahil l sharif
fazilka - फोटो : अमर उजाला
फाजिल्का(पंजाब) में डुग्गर प्रदेश के वीर सपूत के नाम से एक भव्य स्मारक है, जहां हर वर्ष बैसाखी और विजय दिवस पर मेला लगता है। एक प्रण पट्टिका भी लगी है, जिस पर लिखा है, ‘ऐसी माएं धन्य हैं, जिन्होंने ऐसे सपूतों को जन्म दिया। 
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