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सुरों से सरहद पार: सीमा ने पहुंचाया शांति का संदेश, मंदिर में भजन गाने से शुरुआत; साहित्य अकादमी से सम्मानित
Wed, 02 Sep 2026 03:16 AM IST
दुष्यंत शर्मा
रिया सरमाल, जम्मू
रिया सरमाल, जम्मू
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 02 Sep 2026 03:16 AM IST
सार
7 साल की उम्र में गांधीनगर के लक्ष्मीनारायण मंदिर में पहला भजन गाने वाली सीमा अनिल सहगल के संगीत सफर की शुरुआत इसी सिक्के से हुई। मंदिर में एक साधु ने उन्हें 50 पैसे आशीर्वाद के रूप में दिए थे।
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सीमा अनिल सहगल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हाथ में 50 पैसे का सिक्का और मन में गायिका बनने का सपना। 7 साल की उम्र में गांधीनगर के लक्ष्मीनारायण मंदिर में पहला भजन गाने वाली सीमा अनिल सहगल के संगीत सफर की शुरुआत इसी सिक्के से हुई। मंदिर में एक साधु ने उन्हें 50 पैसे आशीर्वाद के रूप में दिए थे।
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सीमा आज भी इसे पहला सम्मान मानती हैं। 13 अगस्त को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से साहित्य अकादमी सम्मान पाने के बाद जम्मू लौटीं सीमा ने अमर उजाला से अपने सफर के पहलुओं को साझा किया। साहित्य व संगीत से जुड़े पिता यश राज शर्मा के घर से मिले माहौल ने उनकी रुचि को दिशा दी, लेकिन पहचान बनाने के लिए उन्होंने खुद संघर्ष किया। दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रवृत्ति परीक्षा पास करने के बाद उन्हें भारतीय कला केंद्र में रहकर संगीत सीखने का अवसर मिला।
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पाकिस्तान के पीएम को भेंट किया था एलबम
सीमा ने बताया कि भारत-पाक तनाव के दौर में संगीत सेे शांति का संदेश देने की कोशिश की। उन्होंने कवि अली सरदार जाफरी की पंक्तियों को संगीतबद्ध कर सरहद एलबम तैयार किया। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पाकिस्तान दौरे के दौरान यह एलबम वहां के प्रधानमंत्री को भेंट किया था। उसके बाद सीमा को पीस सिंगर के रूप में पहचान मिली। उन्होंने लहू का रंग एक है जैसे प्रोजेक्ट के जरिए भी शांति का संदेश दिया।
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