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Exclusive: देवरिया में निर्दलियों के हाथ में होगी जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव की चाबी, ये है बड़ी वजह
Wed, 05 May 2021 10:26 AM IST
vivek shukla
विनोद कुमार तिवारी, देवरिया।
विनोद कुमार तिवारी, देवरिया।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 05 May 2021 10:26 AM IST
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पंचायत चुनव।
- फोटो : amar ujala
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उत्तर प्रदेश के देवरिया में जिला पंचायत सदस्य चुनाव में नई सत्ता तिकड़मी दिग्गजों के बजाय मतदाताओं ने सामान्य उम्मीदवारों पर भरोसा अधिक जताया। जिला पंचायत के 56 वार्डों के लिए 685 उम्मीदवार अपना भाग्य आजमा रहें थे। जिसमें भाजपा को छह, सपा को बीस, बसपा को पांच एवं कांग्रेस को दो सीटों पर विजय प्राप्त हो सका। ऐसे में जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव की चाभी निर्दल जीते जिला पंचायत सदस्यों के पाले में ही होगी।
पंचायत चुनाव।
- फोटो : amar ujala
जिला पंचायत अध्यक्ष बनने का जिन्होंनें दावा किया उन्हें मतदाताओं ने नजरअंदाज कर ऐसे उम्मीदवारों को अपना सदस्य चुना जो भले ही पहली बार चुनाव में उतरे थे लेकिन भरोसा नहीं जीत सके। लाख कोशिशों और पूरा दम झोंकने के बाद पंचायत चुनाव परिणाम उनके मन माफिक नहीं रहा। खास कर भाजपा में चुनाव नतीजा सामने आने के बाद हलचल मच गई है। सोशल मीडिया पर संगठन के नेताओं के प्रति अपशब्द कार्यकर्ता पोस्ट कर रहे हैं।
पंचायत चुनाव।
- फोटो : amar ujala
पंचायत चुनाव के बहाने भाजपा, सपा, बसपा कांग्रेस सहित राजनैतिक दलों की मंशा प्रदेश में अगले साल 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में अपने दल की मजबूती की थाह लेना मकसद रहा है। लेकिन इसके बावजूद कुछ को छोड़ दिया जाए तो भाजपा के बड़े नेता घर से बाहर पंचायत चुनाव में प्रचार के लिए नहीं निकलें।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला।
चुनाव प्रचार न करने के पीछे भाजपा के बड़े नेताओं की मंशा एवं मजबूरी जो भी रही हो लेकिन चुनाव लड़ रहे कार्यकर्ताओं में हार के बाद उनके मन में खोट पैदा हो गई है। जो भी हो पंचायत चुनाव में हुई जीत से ही इस बात का पता चल गया है कि किस दल की गांवों में स्थिति क्या है। चुनाव परिणाम पर गौर किया जाए तो ऐसा ही विधानसभा में स्थिति रही तो भाजपा अपना खाता भी नहीं खोल पाएंगी।
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पंचायत चुनाव।
- फोटो : amar ujala
अपने जीतने में कम, दूसरे को हराने में जुटे रहे अध्यक्ष के संभावित उम्मीदवार
पंचायत चुनाव में खासकर भाजपा में जो भी अध्यक्ष जिला पंचायत बनने का दावा कर चुनाव लड़ें उसमें तकरीबन सभी चुनाव हार गए। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह रहा कि कुछ उम्मीदवारों को अपने जीतने की कम, दूसरे को हराने की अधिक चिंता सता रहीं थी। कुछ विधायकों ने भी अपने उम्मीदवारों को हराने में अहम भूमिका अदा की। जिसकी वजह से भाजपा की किरकिरी हुई है। दल के कुछ जिम्मेदार लोगों ने भी चुनाव में दल के बागियों को चुनाव लड़ाकर एक दूसरे को हराने में अहम भूमिका निभाई। वैसे उम्मीदवारों ने चुनाव जीतने के लिए हर जतन किया है। मतदाताओं को लुभाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। तमाम- दावे वादे किए गए, दावत को दिए गए, शराब से लेकर पैसा बांटा गया। बड़े-बड़े आश्वासन एवं भविष्य में एक दूसरे का साथ निभाने का वादा किया फिर भी सफलता उनके हाथ नहीं लगी।
पंचायत चुनाव में खासकर भाजपा में जो भी अध्यक्ष जिला पंचायत बनने का दावा कर चुनाव लड़ें उसमें तकरीबन सभी चुनाव हार गए। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह रहा कि कुछ उम्मीदवारों को अपने जीतने की कम, दूसरे को हराने की अधिक चिंता सता रहीं थी। कुछ विधायकों ने भी अपने उम्मीदवारों को हराने में अहम भूमिका अदा की। जिसकी वजह से भाजपा की किरकिरी हुई है। दल के कुछ जिम्मेदार लोगों ने भी चुनाव में दल के बागियों को चुनाव लड़ाकर एक दूसरे को हराने में अहम भूमिका निभाई। वैसे उम्मीदवारों ने चुनाव जीतने के लिए हर जतन किया है। मतदाताओं को लुभाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। तमाम- दावे वादे किए गए, दावत को दिए गए, शराब से लेकर पैसा बांटा गया। बड़े-बड़े आश्वासन एवं भविष्य में एक दूसरे का साथ निभाने का वादा किया फिर भी सफलता उनके हाथ नहीं लगी।