आयुष विश्वविद्यालय: सभी प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों के पाठ्यक्रमों की होगी पढ़ाई, दो साल में हो जाएगा तैयार
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अनुमान है कि आयुष विश्वविद्यालय के संपूर्ण प्रोजेक्ट पर तकरीबन एक हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा। राज्य में आयुष विधा के वर्तमान में 94 कॉलेज अलग अलग विश्वविद्यालयों/ संस्थानों से संबद्ध हैं। जल्द ही प्रदेश के आयुर्वेद के 67 कॉलेज (8 सरकारी व 58 निजी), यूनानी के 15 कॉलेज (2 सरकारी व 13 निजी) तथा होम्योपैथी के 12 कॉलेज (9 सरकारी व 3 निजी) समन्वित रूप से आयुष विश्वविद्यालय से संबद्ध कर दिए जाएंगे। एक जगह संबद्धता होने से इन कॉलेजों के डिग्री व डिप्लोमा के पाठ्यक्रमों में एकरूपता रहेगी और सत्र का नियमन भी आसान होगा।
पढ़ाई के साथ इलाज की भी सुविधा
आयुष विश्वविद्यालय में आयुर्वेदिक, यूनानी, सिद्धा, होम्योपैथी और योग चिकित्सा की पढ़ाई और उस पर शोध कार्य तो होगा ही, लोगों को 'नो साइड इफेक्ट' वाली इन पद्धतियों से इलाज की सुविधा भी मिलेगी।
आयुष विश्वविद्यालय औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देकर किसानों के जीवन में खुशहाली भी लाएगा। विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की देखरेख में वह औषधीय खेती के लिए प्रेरित होंगे। विश्वविद्यालय परिसर में भी अलग से औषधीय पादप उद्यान विकसित किया जाएगा।