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Gorakhpur News: निपुण बनकर ही बेहतर जीवन जी सकती हैं महिलाएं
Wed, 07 Oct 2026 03:14 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Wed, 07 Oct 2026 03:14 AM IST
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गोरखपुर। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) गोरक्षप्रांत की ओर से मंगलवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के दीक्षा भवन में वसुंधरा युवती सम्मेलन का आयोजन किया गया। नारी सशक्तिकरण और क्षमता संवर्धन पर आयोजित सम्मेलन में एमएमएमयूटी की कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा ने कहा कि निपुण बनकर ही जीवन को बेहतर तरीके से जिया जा सकता है और इसके लिए शिक्षा बेहद जरूरी है। उन्होंने छात्राओं से आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित करने के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा ने कहा कि आधी सदी बाद एमएमएमयूटी में किसी महिला को कुलपति बनने का अवसर मिला है। देश में एक हजार से अधिक विश्वविद्यालय हैं, लेकिन इनमें करीब 120 महिलाओं को ही नेतृत्व का अवसर मिल रहा है। लोकसभा में महिलाओं की भागीदारी करीब 14 और राज्यसभा में करीब 16 फीसदी है। उन्होंने कहा कि 70 से 80 फीसदी कामकाजी महिलाओं में वित्तीय साक्षरता का स्तर बेहद कम है। ऐसे में महिलाओं के लिए शिक्षा के साथ वित्तीय समझ, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आगे बढ़ते हुए संस्कार और संवेदनशीलता को भी बनाए रखना होगा।
विशिष्ट अतिथि राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी ने कहा कि आगे बढ़ने के लिए संकल्प भाव से कार्य करना होगा। क्षमता के बिना किसी भी लक्ष्य को हासिल करना आसान नहीं है। विशिष्ट अतिथि पूर्व मेयर डॉ. सत्या पांडेय ने छात्राओं का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रयास भी बड़े करने होंगे।
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मुख्य वक्ता प्रो. सुषमा पांडेय ने कहा कि स्वयं को बेहतर बनाने के लिए पूरी मेहनत और लगन से प्रयास करना होगा। सुधा मोदी ने कहा कि सपने हमारे हैं और उन्हें पूरा करने का संकल्प भी हमें ही लेना होगा। प्रस्ताविकी डॉ. अर्चना सिंह ने रखी।
सम्मेलन के समापन पर छात्राओं ने मिशन साहसी के तहत ताइक्वांडो का प्रदर्शन किया। इसके माध्यम से छात्राओं को आत्मरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। प्रदर्शन के दौरान संदेश दिया गया कि लड़ना कोई सिखा सकता है, लेकिन मुकाबला खुद ही करना पड़ता है।
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प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा ने कहा कि आधी सदी बाद एमएमएमयूटी में किसी महिला को कुलपति बनने का अवसर मिला है। देश में एक हजार से अधिक विश्वविद्यालय हैं, लेकिन इनमें करीब 120 महिलाओं को ही नेतृत्व का अवसर मिल रहा है। लोकसभा में महिलाओं की भागीदारी करीब 14 और राज्यसभा में करीब 16 फीसदी है। उन्होंने कहा कि 70 से 80 फीसदी कामकाजी महिलाओं में वित्तीय साक्षरता का स्तर बेहद कम है। ऐसे में महिलाओं के लिए शिक्षा के साथ वित्तीय समझ, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आगे बढ़ते हुए संस्कार और संवेदनशीलता को भी बनाए रखना होगा।
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विशिष्ट अतिथि राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी ने कहा कि आगे बढ़ने के लिए संकल्प भाव से कार्य करना होगा। क्षमता के बिना किसी भी लक्ष्य को हासिल करना आसान नहीं है। विशिष्ट अतिथि पूर्व मेयर डॉ. सत्या पांडेय ने छात्राओं का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रयास भी बड़े करने होंगे।
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मुख्य वक्ता प्रो. सुषमा पांडेय ने कहा कि स्वयं को बेहतर बनाने के लिए पूरी मेहनत और लगन से प्रयास करना होगा। सुधा मोदी ने कहा कि सपने हमारे हैं और उन्हें पूरा करने का संकल्प भी हमें ही लेना होगा। प्रस्ताविकी डॉ. अर्चना सिंह ने रखी।
सम्मेलन के समापन पर छात्राओं ने मिशन साहसी के तहत ताइक्वांडो का प्रदर्शन किया। इसके माध्यम से छात्राओं को आत्मरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। प्रदर्शन के दौरान संदेश दिया गया कि लड़ना कोई सिखा सकता है, लेकिन मुकाबला खुद ही करना पड़ता है।