अमर उजाला पड़ताल: रेफरल सेंटर बनकर गया बीआरडी मेडिकल कॉलेज का ट्रॉमा सेंटर, नौ साल बाद भी नहीं मिले डॉक्टर
बीआरडी मेडिकल कॉलेज की ओर से ट्रॉमा सेंटर को बेहतर बनाने और न्यूरो, कार्डियालॉजी सर्जन के लिए प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन शासन से किसी डॉक्टर की नियुक्ति नहीं हो सकी है। यह तब है जबकि ट्रॉमा सेंटर में चार
विशेषज्ञ सर्जन की मौजूदगी 24 घंटे अनिवार्य है। इसमें न्यूरो, हार्ट, जनरल और आर्थो के सर्जन शामिल हैं।
कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर से हर माह करीब 450 से अधिक मरीज रेफर किए जा रहे हैं। इनमें सबसे अधिक न्यूरो सर्जरी के मरीज शामिल हैं। कार्डियक, जनरल सर्जरी के भी मरीज रेफर किए जा रहे हैं।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के एसआईसी डॉ राजेश कुमार ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में न्यूरो सर्जन और कार्डियक सर्जन नहीं हैं। इसके बाद भी मरीजों को भर्ती करके इलाज किया जा रहा है। ज्यादा गंभीर स्थिति होने पर ही मरीजों को रेफर किया जाता है। तमाम गंभीर मरीज ठीक होकर अपने घर गए हैं।
सिर में लगी चोट, इलाज के लिए केजीएमयू रेफर
बिहार के गोपालगंज की रहने वाली लक्ष्मीना देवी (43) सड़क हादसे में शनिवार को गंभीर रूप से घायल हो गईं। गोपालगंज से डॉक्टरों ने बीआरडी के लिए रेफर किया। यहां पर पहुंचने पर पता चला कि सिर में गंभीर चोटें आई हैं। न्यूरो सर्जरी का मामला है। बीआरडी में न्यूरो के डॉक्टर न होने के कारण केजीएमयू लखनऊ रेफर कर दिया गया।
केस- दो
छत से गिरे, सिर में आई चोट
कुशीनगर के नेबुआ नौरंगिया निवासी बुद्धिराम गुप्ता (60) शनिवार को छत से गिर गए। परिजन इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। डॉक्टरों ने कुशीनगर जिला अस्पताल रेफर किया था। कुशीनगर से डॉक्टरों ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। बीआरडी पहुंचने पर डॉक्टरों ने केजीएमयू, लखनऊ रेफर कर दिया।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 2012 में ट्रॉमा सेंटर बनाया गया है। इसके बाद से न्यूरो और कार्डियोलॉजी विभाग के सर्जन नहीं मिल सके हैं। जबकि कई बार इसे लेकर प्रयास किया गया, इसके बाद भी डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं हो सकी है।
गोरखपुर से 300 किलोमीटर है लखनऊ की दूरी
गोरखपुर से लखनऊ की दूरी 300 किलोमीटर है। इस बीच अगर मरीज बीआरडी से रेफर होता है तो उसे एंबुलेंस से ले जाने में कम से पांच से छह घंटे लगते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक गंभीर मरीज के बारें में यह बता पाना मुश्किल है कि वह इस दौरान बचेगा या नहीं।