भगवान शिव को प्रिय सावन मास में दूसरा सोमवार 25 जुलाई को धूमधाम से मनाया जा रहा है। श्रद्धालु सोमवार को शिवालयों में पहुंचकर महादेव का जलाभिषेक और पूजन-अर्चन कर उन्हें प्रसन्न कर रहे हैं। बम-बम भोल और हर-हर महादेव से शिवालय गूंज रहे हैं।
Sawan 2022: भगवान शंकर को प्रसन्न करने में जुटे श्रद्धालु, हर-हर महादेव से गूंजा शिवालय
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ऐसे करें पूजन
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, सोमवार को शिवालय जाकर पंचाक्षरी मंत्र के साथ दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, पंचामृत, इत्र, फलों के रस, गंगाजल से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करें। चने की दाल, सरसों तेल, काले तिल आदि से महादेव का अभिषेक करें। इसके बाद फूल, दूर्वा, बिल्वपत्र, आकपुष्प, धतूरा, कनेल आदि चढ़ाएं। नैवेद्य, फलों से भोग लगाएं। श्रीफल भेंट करने के बाद धूप-दीप से आरती करें।
रुद्राभिषेक का मानव जीवन में है विशेष महत्व
ज्योतिषाचार्य पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, रुद्राभिषेक का मानव जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। रुद्राभिषेक से मन शुद्ध और सत्वगुणी होता है। इससे संकल्प शक्ति में वृद्धि होती है। इसके साथ ही ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, श्रद्धा, भक्ति और पवित्रता मे भी वृद्धि होती है। धन लाभ और आरोग्यता प्राप्त होती है। बताया कि धर्मशास्त्र में कहा गया है कि वेद शिव है और शिव वेद हैं। इसलिए वेद मंत्रों द्वारा भगवान आशुतोष का पूजन अभिषेक किया जाता है। जैसे ब्रह्म सभी पदार्थों मे व्याप्त हैं, वैसे ही भगवान रुद्र (शिव) अग्नि, जल, औषधि, वनस्पति आदि सभी पदार्थों में समाहित हैं। समस्त ब्रह्मांड को वह अपनी शक्ति से सामर्थ्यवान बनाते हैं। इसलिए उनका नाम रुद्र पड़ा है।
पदार्थों से रुद्राभिषेक और उससे मिलने वाला फल
ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार, जल से वर्षा, कुशा के जल से शांति, दधि से पशु प्राप्ति, मधु और घी से धन, तीर्थजल से मोक्ष, दुग्ध से शीघ्र संतान प्राप्ति, प्रमेह रोग की शंति और मनोवांछित फलों की प्राप्ति, शर्करा मिले दूध से रुद्राभिषेक करने से जड़ बुद्धि निर्मल होता है। सरसों के तेल से अभिषेक करने पर विरोधियों का प्रभाव न्यून होता है। जिस ग्रह की जो समिधा है, उसको मिलाकर अभिषेक करने से उस ग्रह का प्रकोप समाप्त होता है।
रुद्राभिषेक से संक्रामक रोगों का नाश, शारीरिक समस्त दोषों का नाश, सर्वविध अमंगलों का नाश, पैशाचिक कष्टों से निवृत्ति और सभी प्रकार की विघ्न बाधाएं दूर हो जाती हैं। रुद्राभिषेक से शत्रु भी मित्र हो जाते हैं। असाध्य कार्य भी साध्य हो जाता है और सर्वत्र विजय प्राप्त होती है।