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Exclusive: कोरोना से ठीक हुए बच्चों में मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम का खतरा, जानिए इसके लक्षण
Fri, 28 May 2021 12:08 PM IST
vivek shukla
नीरज मिश्र, गोरखपुर।
नीरज मिश्र, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 28 May 2021 12:08 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
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कोरोना वायरस की दूसरी लहर में बच्चे भी संक्रमण की चपेट में आए हैं। गोरखपुर में वायरस ने अब तक छह बच्चों की जान ली है। राहत की बात यह है कि बच्चों के ठीक होने की दर 96 प्रतिशत है। लेकिन अब ठीक होने के बाद बच्चों को एमआईएस-सी (मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम) अपनी चपेट में ले रहा है। इस तरह के केस जिले में मिलने लगे हैं। निजी अस्पतालों के बाल रोग विशेषज्ञों के पास बच्चे इलाज कराने आ रहे हैं। चिकित्सक इसे बेहद खतरनाक बता रहे हैं। उनका कहना है कि सिंड्रोम से ग्रस्त बच्चों का इलाज महंगा है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश गुप्ता
- फोटो : अमर उजाला।
आईएमए के पूर्व सचिव व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश गुप्ता ने बताया कि यह संक्रमण कोविड से ठीक होने के चार से छह सप्ताह के बाद होता है। यह बेहद खतरनाक है। ऐसे में अगर बच्चों में एमआईएस-सी का लक्षण दिखे तो तत्काल डॉक्टर से सलाह लें। सही समय पर अगर इसका इलाज हो जाता है तो खतरा कम हो जाता है। साथ ही खर्चे भी कम आते हैं। लेकिन अगर इलाज में देरी होती है तो यह दिल, पाचन तंत्र, गुर्दे, त्वचा, आंखों पर असर डालता है।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला।
एमआईएस-सी बीमारी नहीं, बल्कि सिंड्रोम है
आईएमए के पूर्व सचिव डॉ राजेश गुप्ता ने बताया कि मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम बीमारी नहीं है, बल्कि यह लक्षणों पर आधारित एक सिंड्रोम है। इसमें बच्चों के फेफड़ों, दिल, पाचन तंत्र, गुर्दे, त्वचा, मस्तिष्क और आंखों में संक्रमण और सूजन होता है। इस तरह के केस अब सामने आने लगे हैं। ऐसे में लोगों को सलाह दी जा रही है कि कोविड से ठीक होने के बाद बच्चों पर चार से छह सप्ताह तक विशेष नजर रखें।
आईएमए के पूर्व सचिव डॉ राजेश गुप्ता ने बताया कि मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम बीमारी नहीं है, बल्कि यह लक्षणों पर आधारित एक सिंड्रोम है। इसमें बच्चों के फेफड़ों, दिल, पाचन तंत्र, गुर्दे, त्वचा, मस्तिष्क और आंखों में संक्रमण और सूजन होता है। इस तरह के केस अब सामने आने लगे हैं। ऐसे में लोगों को सलाह दी जा रही है कि कोविड से ठीक होने के बाद बच्चों पर चार से छह सप्ताह तक विशेष नजर रखें।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
ये हैं एमआईएस-सी के लक्षण
बुखार आना, सूजन आना, मुंह में छाले, शरीर पर चकत्ते पड़ना, बुखार का बराबर रहना, सांस लेने में तकलीफ, पेट में दर्द, त्वचा का नीला पड़ना, नाखूनों का नीला पड़ना, आंखों में लाली आदि। ऐसे में अगर संक्रमण से जंग जीतने वाले बच्चों में इस तरह की समस्या होती है तो तत्काल डॉक्टर से सलाह लें।
बुखार आना, सूजन आना, मुंह में छाले, शरीर पर चकत्ते पड़ना, बुखार का बराबर रहना, सांस लेने में तकलीफ, पेट में दर्द, त्वचा का नीला पड़ना, नाखूनों का नीला पड़ना, आंखों में लाली आदि। ऐसे में अगर संक्रमण से जंग जीतने वाले बच्चों में इस तरह की समस्या होती है तो तत्काल डॉक्टर से सलाह लें।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला।
बच्चों के खाने में ये चीजें करें शामिल
बच्चों के खाने में विटामिन-सी को शामिल करें, जैसे- खट्टे फल, जिंक से भरपूर भोजन, बच्चों को पैकेट बंद चीजें, जैसे- चिप्स, कोल्ड ड्रिंक आदि न दें। दूध और प्रोटीन को बच्चों के खाने में शामिल करें। समय-समय पर बच्चों के खाने को चेक भी करते रहे।
बच्चों के खाने में विटामिन-सी को शामिल करें, जैसे- खट्टे फल, जिंक से भरपूर भोजन, बच्चों को पैकेट बंद चीजें, जैसे- चिप्स, कोल्ड ड्रिंक आदि न दें। दूध और प्रोटीन को बच्चों के खाने में शामिल करें। समय-समय पर बच्चों के खाने को चेक भी करते रहे।