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Gorakhpur News: 23 शवों को मिली मिट्टी, घरों में अब भी अपनों का इंतजार

Sat, 05 Sep 2026 02:22 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 05 Sep 2026 02:22 AM IST
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23 bodies laid to rest; families still await their loved ones at home.
गोरखपुर। किसी घर में आज भी दरवाजे की आहट उम्मीद जगाती होगी...किसी मां को लगता होगा कि उसका बेटा अचानक सामने खड़ा हो जाएगा। किसी पत्नी की नजर राह पर होगी और किसी भाई को विश्वास होगा कि बिछड़ा अपना लौट आएगा, लेकिन शायद उन्हें यह पता ही नहीं कि उनकी तलाश का जवाब किसी दूसरे जिले की सड़क, रेलवे ट्रैक या सुनसान जगह पर मिले उस शव में छिपा था, जिसे पहचान न मिलने पर मिट्टी दे दी गई।
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गोरखपुर में पिछले तीन वर्षों में मिले 23 अज्ञात शवों की पहचान आज तक नहीं हो सकी। उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी हो गई, लेकिन उनके नाम, घर और रिश्तों का पता नहीं चल सका। पुलिस रिकॉर्ड में ये 23 शव एक संख्या हैं, मगर इनके पीछे कितने परिवारों का इंतजार है, इसका कोई आंकड़ा नहीं है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2024 से 2026 के बीच गोरखपुर में 48 अज्ञात शव मिले। इनमें 25 की पहचान कर ली गई, जबकि 23 अब भी बेनाम हैं। पहचान नहीं हो सके शवों में 16 पुरुष और सात महिलाएं हैं। वर्ष 2024 में छह पुरुष और तीन महिला शवों की पहचान नहीं हो सकी। 2025 में चार पुरुष और दो महिला तथा 2026 में अब तक छह पुरुष और दो महिला शवों की पहचान नहीं हो सकी।
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विशेषज्ञों का कहना है कि देशभर में गुमशुदा लोगों और अज्ञात शवों का एकीकृत डिजिटल डेटाबेस बनाया जाए। पुलिस, रेलवे पुलिस, अस्पतालों और फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं के बीच रियल टाइम डाटा साझा होने से किसी गुमशुदा व्यक्ति और अज्ञात शव के बीच संबंध तलाशना आसान होगा। डीएनए और फेस रिकॉग्निशन जैसी तकनीकों का दायरा बढ़ाना भी जरूरी है।
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शव की कहानी खत्म, परिवार की तलाश नहीं
अज्ञात शव मिलने के बाद पुलिस फोटोग्राफ, फिंगरप्रिंट और उपलब्ध अन्य विवरण सुरक्षित करती है। पहचान के लिए निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जाती है। तय अवधि तक कोई सुराग नहीं मिलने पर विधिक प्रक्रिया के तहत अंतिम संस्कार करा दिया जाता है। यहीं पुलिस की प्रक्रिया पूरी हो जाती है, लेकिन किसी परिवार की तलाश शायद वहीं से और लंबी हो जाती है। थाने में दर्ज गुमशुदगी की रिपोर्ट के बाद परिजन अस्पतालों, थानों और संभावित स्थानों पर अपनों को तलाशते रहते हैं। कई बार उन्हें यह जानकारी भी नहीं मिल पाती कि कहीं बरामद हुआ कोई अज्ञात शव उनके ही घर के लापता सदस्य का था।
तकनीक के बावजूद दो ही शवों तक पहुंची पहचान
अज्ञात शवों की पहचान के लिए डीएनए प्रोफाइलिंग, फिंगरप्रिंट और फेस रिकॉग्निशन जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके बावजूद पिछले तीन वर्षों में इन तकनीकी माध्यमों से केवल दो मामलों में पहचान हो सकी। सबसे बड़ी दिक्कत गुमशुदगी और अज्ञात शवों के रिकॉर्ड के बीच समय पर कड़ी जुड़ने की है। कोई व्यक्ति दूसरे जिले या राज्य से लापता होता है और उसका शव कहीं और मिलता है। अलग-अलग एजेंसियों और राज्यों के रिकॉर्ड में तत्काल मिलान न होने से सुराग हाथ से निकल सकता है। क्षत-विक्षत शवों में चेहरा या पहचान चिह्न स्पष्ट न होने पर मुश्किल और बढ़ जाती है।
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गुमशुदगी और अज्ञात शवों का राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत डिजिटल डेटाबेस जरूरी है। सभी राज्यों की पुलिस, रेलवे पुलिस, अस्पतालों और फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं के बीच रियल टाइम डाटा साझा होने से पहचान की प्रक्रिया तेज हो सकती है। डीएनए प्रोफाइलिंग और फेस रिकॉग्निशन का दायरा भी बढ़ाने की जरूरत है।

- डॉ. कीर्ति वर्धन, फॉरेंसिक एक्सपर्ट
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प्रत्येक अज्ञात शव का फोटोग्राफ, फिंगरप्रिंट और उपलब्ध अन्य विवरण सुरक्षित रखा जाता है। पहचान के लिए नियमानुसार हर संभव प्रयास किए जाते हैं। निर्धारित अवधि में शिनाख्त नहीं होने पर विधिक प्रक्रिया के तहत अंतिम संस्कार कराया जाता है।

- डॉ. कौस्तुभ, एसएसपी
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