गोरखपुर शहर में इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) लगाकर छह माह में एक करोड़ रुपये से अधिक वसूल लिए, लेकिन जनता को सुविधाएं देना भूल गए। व्यवस्थाएं ऐसी बनाईं हैं कि पैडलेगंज, छात्रसंघ चौराहा और शास्त्री चौक पर सिग्नल की लाइटें ही नहीं दिखतीं। सड़क की बाईं लेन वाहनों से भरी रहती है। इस कारण जाम आम बात हो गई है। सिग्नल की समयसीमा तय करने में भी मनमानी की गई है। कई जगह 144 से 165 सेकेंड तक ट्रैफिक रोका जा रहा है तो कई जगह 15-20 सेकेंड ही यातायात को रोका जाता है। जहां लंबे समय तक यातायात रोका जाता है वहां जाम लग जाता है।
अमर उजाला पड़ताल: गोरखपुर में एक करोड़ से अधिक जुर्माना वसूला, सुविधाएं देना भूल गए
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टाइमिंग की सेटिंग ऐसी कि हर तरफ जाम
अलग-अलग चौराहों पर सिग्नल की टाइमिंग ऐसी है कि हर तरफ जाम लगा रहता है। छात्रसंघ चौराहा से पैडलेगंज की तरफ आने पर 144 सेकेंड तक इंतजार करना पड़ता है। इसका असर होता है कि सिंगल लेन की सड़क पर छात्रसंघ से पैडलेगंज तक जाम लग जाता है। उमस भरी गर्मी व तेज धूप के बीच लोग परेशान होते हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत दोपहर एक बजे से ढाई बजे के बीच होती है। इस समय सिविल लाइंस क्षेत्र के स्कूलों, विश्वविद्यालय और डिग्री कॉलेजों में छुट्टी होती है। लिहाजा, गोलघर, विश्वविद्यालय चौराहा, छात्रसंघ चौराहा, आंबेडकर चौका और ऐश्प्रा तिराहा जाम से पूरी तरह से चोक हो जाता है। बेतियाहाता चौराहे से बजाज पार्क की ओर से जाने पर समस्या ज्यादा गहराती है। इसका असर शास्त्री चौक तक देखने को मिलता है। कुछ यही हाल आंबेडकर चौक से शास्त्री चौक के बीच का मिला है।
जब सिग्नल फ्री तो जाम कम, नहीं तो लंबी लाइन
मोहद्दीपुर चौराहे पर सिग्नल का समय तीन मिनट तक तय है। इससे गाड़ियों की लंबी कतार लगती है। पैडलेगंज से मोहद्दीपुर और एयरपोर्ट से मोहद्दीपुर आने वाली सड़क पर जबरदस्त जाम लगता है। असुरन चौक से मोहद्दीपुर की सड़क भी जाम रहती है। जब ट्रैफिक सिग्नल फ्री कर दिया जाता है तो जाम की समस्या नहीं गहराती। गाड़ियां आराम से निकल जाती हैं।
बायीं लेन किसी चौराहे पर खाली नहीं
जाम की सबसे बड़ी एक वजह बायीं लेन का खाली न होना है। कई बार लेन खाली कराने के दावे किए गए, लेकिन हकीकत में कुछ नहीं हुआ। कई बार एंबुलेंस भी बायीं लेन में फंसी दिखती है। यह समस्या कमोबेश हर चौराहा व तिराहा पर देखने को मिली है।
कम दूरी पर लगा दिए आईटीएमएस
आंबेडकर चौक, शास्त्री चौक, गणेश चौराहा, काली मंदिर तिराहा, बेतियाहाता चौराहा, यातायात तिराहा, ऐश्प्रा तिराहा, विश्वविद्यालय चौराहा और छात्रसंघ चौक दो किलोमीटर के दायरे में हैं, फिर भी हर जगह आईटीएमएस लगाए गए हैं। इससे यातायात व्यवस्था के सुगम संचालन में दिक्कत आ रही है। कुछ-कुछ दूरी पर सिग्नल जलता है। इससे जाम की समस्या गहराती है। वाहनों की औसत स्पीड भी नहीं बन पाती। हर चौराहे व तिराहे पर गाड़ी रुकती है। इससे डीजल व पेट्रोल की खपत भी बढ़ी है।
... तो सिर्फ चार गाड़ियों ने ही तोड़े नियम
एक ओर जहां आम जनता पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना ठोंका गया है, वहीं सरकारी गाड़ियों के लिए कोई नियम कायदा नहीं है। छह महीने में सिर्फ दस बार सरकारी गाड़ी का चालान काटा गया। इसमें भी गाड़ियां सिर्फ छह ही हैं। एक गाड़ी का चार बार तो एक का दो बार चालान हुआ है। अन्य चार गाड़ियों का एक-एक बार चालान काटा गया।
एसपी सिटी कृष्ण कुमार विश्नोई ने कहा कि सड़क की बायीं लेन खाली कराने के लिए 21 चौराहों को चिह्नित किया गया है। यातायात पुलिस, नगर निगम के अफसर सामंजस्य बनाकर जल्द ही बैरियर लगाएंगे। बायीं लेन खाली होने से यातायात संचालन ठीक हो जाएगा। कुछ जगहों पर सिग्नल की टाइमिंग की दिक्कत सामने आई है। इसे भी इंजीनियरों की मदद से सही कराया जाएगा।
छह महीने (एक जनवरी से 30 जून तक) में वसूला गया जुर्माना
| ट्रैफिक रूल | चालान | शमन शुल्क |
| बिना हेलमेट | 51,998 | 48,25000 |
| सीट बेल्ट | 4,503 | 6,47,500 |
| मोबाइल पर बात करते ड्राइविंग | 626 | 69,500 |
| नो पार्किंग में गाड़ी | 29,586 | 19,70,500 |
| रेड लाइट क्रॉस करना | 4,833 | 4,74,800 |
| तीन सवारी | 4,465 | 5,16,100 |
| स्टंट करते हुए | 20 | अभी नहीं वसूला गया |
| ड्रंक-एंड-ड्राइव | 22 | अभी नहीं वसूला गया |
| ओवर स्पीडिंग पर | 657 | 1,62000 |
| अन्य नियमों पर | 4,849 | 6,77,700 |