गोरखपुर समेत पूरे पूर्वांचल में विकास की नई इबारत लिख रहा गोरखपुर खाद कारखाना अब पूरी क्षमता से ‘दौड़ने’ को तैयार हो गया है। 21 जुलाई तक कारखाने में पूरी क्षमता से यानी रोजाना 3,850 मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन शुरू हो जाएगा। कुछ दिनों से मशीनों की जांच व मरम्मत (सर्विसिंग) का काम चल रहा था जो मंगलवार को पूरा हो गया। बुधवार शाम से फिर से उत्पादन शुरू हो जाएगा।
Good News: अब पूरी क्षमता से उत्पादन को तैयार गोरखपुर खाद कारखाना, यहां के यूरिया की है अलग पहचान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयास से करीब तीन दशक बाद दोबारा शुरू हुए इस कारखाने ने मई 2022 में ही रोजाना तीन हजार मीट्रिक टन से अधिक का उत्पादन शुरू कर दिया था। यही नहीं 30 मई को एक दिन में 4,040 मीट्रिक टन यूरिया आपूर्ति का भी रिकार्ड बना। कारखाने से अब तक एक लाख मीट्रिक टन से अधिक यूरिया की आपूर्ति हो चुकी है। एचयूआरएल के इस खाद कारखाने की शुरुआत में 1,800 से 1,900 मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन हुआ था। एचयूआरएल के वरिष्ठ महाप्रबंधक सुबोध दीक्षित ने बताया कि कुछ दिनों से मशीनों की सर्विसिंग का काम चल रहा था जो अब पूरा हो गया है। बुधवार से फिर से उत्पादन शुरू हो जाएगा। जबकि 20 या 21 जुलाई तक कारखाने में पूरी क्षमता से उत्पादन शुरू हो जाएगा।
दिसंबर 2021 में हुआ लोकार्पण, मार्च 22 से शुरू हुआ उत्पादन
गोरखपुर में एचयूआरएल के खाद कारखाना की स्थापना में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का महत्वपूर्ण योगदान है। यह उनका ड्रीम प्रोजेक्ट रहा है। गोरखपुर में पूर्व में स्थापित खाद कारखाना 1990 में एक हादसे के बाद बंद कर दिया गया था। सांसद बनने के बाद 1998 से ही योगी आदित्यनाथ ने इसे दोबारा चलाने के लिए संघर्ष किया। योगी की पहल पर 22 जुलाई 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुराने खाद कारखाना परिसर में ही नए कारखाने का शिलान्यास किया। 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद इसके निर्माण का रास्ता और प्रशस्त हो गया। सात दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोरखपुर खाद कारखाने का शुभारंभ किया। मार्च 2022 के आखिरी सप्ताह से विधिवत उत्पादन शुरू हो गया।
8,600 करोड़ से 600 एकड़ में बना है कारखाना
8,603 करोड़ रुपये की लागत से करीब 600 एकड़ क्षेत्रफल में गोरखपुर खाद कारखाने का निर्माण हुआ है। पूरी तरह से प्राकृतिक गैस पर आधारित इस खाद कारखाने की अधिकतम उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 3,850 मीट्रिक टन और प्रतिवर्ष 12.7 लाख मीट्रिक टन यूरिया उत्पादन की है। कारखाने से पूर्वांचल ही नहीं उत्तर प्रदेश, बिहार व यूपी से सटे अन्य राज्यों में नीम कोटेड यूरिया की बड़े पैमाने पर आपूर्ति हो रही है।
यहां के यूरिया की है अलग पहचान
गोरखपुर के खाद कारखाने में उच्च गुणवत्ता की नीम कोटेड यूरिया बन रही है। कारण है, इस कारखाने की प्रीलिंग टावर की रिकार्ड ऊंचाई। यहां बने प्रिलिंग टॉवर की ऊंचाई 149.2 मीटर है जो दुनिया में बने सभी खाद कारखानों के प्रीलिंग टॉवर में सबसे ऊंचा है। इसकी ऊंचाई, कुतुब मीनार से भी दोगुनी है। कुतुब मीनार की ऊंचाई 72.5 मीटर है। प्रीलिंग टावर की ऊंचाई जितनी अधिक होती है, यूरिया के दाने उतने छोटे व गुणवत्ता युक्त बनते हैं। यही वजह है कि यहां की यूरिया की अलग पहचान बन रही है। दाने छोटे होने की वजह से यह खेतों की मिट्टी में तेजी से घुल जाएगी और जल्द असर करेगी।