भारत ही नहीं नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र में भी पाकिस्तानी टिड्डी दल पहुंच गया है। जिसको लेकर किसान काफी परेशान हैं। इन दिनों किसान खेत में धुंआ कर टिड्डी दल से फसलों के बचाव में जुटे हैं। वहीं नेपाल के कृषि ज्ञान केंद्र की ओर से बचाव के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है। अभी सीमावर्ती क्षेत्र में टिड्डी दल का प्रभाव ज्यादा है।
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Locust Attack
- फोटो : अमर उजाला।
मंगलवार को रूपनदेही जिला सहित बुटवल क्षेत्र में टिड्डी दल का प्रभाव बढ़ गया। दक्षिण से उत्तर की ओर बहने वाली हवाओं की गति के साथ आने वाले टिड्डी दल को अन्य क्षेत्रों जैसे मथागढ़ी गांव नगरपालिका, रिबडिकोट नगर पालिका, रेनादेवी छहरा नगर पालिका और तानसेन नगरपालिका क्षेत्र में देखे गए।
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Locust attack
- फोटो : अमर उजाला।
पलपा में हल्की बारिश और बूंदाबांदी के कारण टिड्डी दल एक ही समूह में नहीं दिखे। ऐसे में टिड्डों के पालपा के कुछ स्थानों पर रूके होने की संभावना है। किसान अपने खेत में धुआं सुलगा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने कृषि ज्ञान केंद्र पलपा को सूचित किया था कि तिनयांगुनुपालिका -2, जांगला के इलाके में टिड्डी दल से परेशानी बढ़ गई है।
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Locust attack
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कृषि ज्ञान केंद्र के प्रमुख शिव प्रसाद आर्यल ने बताया कि एक तकनीकी टीम ने झंगला पहुंचकर किसानों को बचाव के लिए जागरूक किया। डोभन के पास्कुंड, बुढ़ासतक और बगहा गांवों के जंगल के पेड़ों में टिड्डे मिले। उन्होंने बताया कि बारिश के मौसम में पानी रुकने पर खेतों में लगाए गए खरपतवार और घास, मक्का और धान के बीज को टिड्डे खा सकते हैं। टिड्डों से बचाव के लिए उपाय करने को कहा गया है।
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टिड्डी दल का हमला।
- फोटो : अमर उजाला।
कृषि ज्ञान केंद्र के प्रमुख शिव प्रसाद आर्यल ने बताया कि भले ही अब तक टिड्डों ने पलपा में फसलों के पत्ते खाए हैं, लेकिन इससे उन्हें ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है। पालपा में बारिश और बूंदा-बांदी के कारण टिड्डियां दूसरे पेड़ों में रहने लगे हैं। उन्होंने बताया कि टिड्डियों के प्रभाव को कम करने के लिए व्यवस्था की जा रही है।