कुशीनगर हादसा: आठ चिताओं पर एक साथ जलीं दस लाशें, फूट-फूटकर रोए लोग
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पनियहवा में गंडक नदी के नारायणी घाट पर एक कतार में आठ चिताएं सजाई गई थीं। उनमें दो चिताओं में से एक पर देवरानी, जेठानी और दूसरी पर दो बहनों की चिता सजाई गई थी। जब उनके परिजनों ने चिताओं में आग लगाई तो लोगों की आंखों से आंसू छलक पड़े। कई लो अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाए और फफककर रो पड़े। ढाई साल की परी और नौ साल की सुंदरी के शव को दफनाया गया। परिजन उनके शवों को कलेजे से लगाए विलाप कर रहे थे। अंतिम संस्कार में किसी ने अपनी बहन तो किसी ने पत्नी अथवा मां की चिता को मुखाग्नि दी।

नौरंगिया गांव के निवासी रमेश चौरसिया का इस हादसे में पूरा परिवार ही उजड़ गया। रमेश ने एक ही चिता पर पत्नी ममता देवी व भाभी शकुंतला देवी पत्नी भोला चौरसिया को मुखाग्नि दी। वहीं भांजी परी चौरसिया पुत्री अजय चौरसिया को मिट्टी देकर दफन किया। हरिलाल कुशवाहा के बड़े भाई महेश कुशवाहा का कुछ वर्ष पूर्व निधन हो गया है। तब से उनके बच्चों का पालन-पोषण हरिलाल ही करते हैं। इस हादसे में उनकी 16 वर्षीय भतीजी राधिका की भी मौत हो गई। राधिका की चिता में आग लगाकर चाचा हरिलाल ने अंतिम विदाई दी।
उजाला उर्फ मनु विश्वकर्मा पुत्री श्रवण व मीरा विश्वकर्मा पुत्री सुग्रीव विश्वकर्मा चचेरी बहनें थीं। उनकी चिता को श्रवण और सुग्रीव ने मुखाग्नि दी। इसी घाट पर 20 वर्षीय बिंद्रा यादव को उसके पिता मंगरू ने मुखाग्नि दी तो वहीं शशिकला चौरसिया को उसके पिता शंभू चौरसिया ने मुखाग्नि दी।
इनका भी एक ही चिता पर हुआ अंतिम संस्कार
रामबड़ाई की दो बेटियां पूजा चौरसिया (18) और ज्योति चौरसिया (14) की भी इस हादसे में मौत हो गई थी। दोनों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर हुआ। उनके पिता रामबड़ाई ने मुखाग्नि दी।
बता दें, बुधवार की रात हल्दी के मटकोड़ की रस्म के दौरान अचानक कुएं का स्लैब टूट गया और 25 से अधिक महिलाएं, युवतियां व बच्चे भरभराकर कुएं में गिर गए। इस दौरान दो बच्चियां सहित 13 महिलाओं की कुएं के अंदर मौत हो गई। घटना के बाद गांव में मातम छा गया।
नौरंगिया गांव के स्कूल टोला निवासी परमेश्वर कुशवाहा के बेटे अमित कुशवाहा के विवाह पूर्व, बुधवार देर रात हल्दी की रस्म अदा की जा रही थी। घर से करीब 100 मीटर दूर स्थित कुएं के सामने मटकोड़ (विवाह के पहले की रस्म) का कार्यक्रम चल रहा था। जिस कुएं के पास कार्यक्रम चल रहा था, उसे आरसीसी स्लैब बनाकर बंद किया गया था।
रस्म के दौरान बड़ी संख्या में महिला, युवती व बच्चियां कुएं पर बने स्लैब पर जाकर खड़े हो गए। अचानक स्लैब टूट गया और उसपर खड़ी महिला, युवतियां व बच्चियां कुएं में समा गईं। कुआं काफी गहरा है। पानी भी भरा था। इस घटना के बाद चीख-पुकार मच गई।
इस बीच किसी व्यक्ति ने घटना की सूचना पुलिस को दी। दल-बल के साथ आए पुलिसकर्मियों ने राहत-बचाव कार्य तेज किया। जिन लोगों को कुएं से बाहर निकाला गया, उन सबको जिला अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने परीक्षण किया और 13 लोगों को मृत घोषित कर दिया। एक साथ 13 शव देखकर सबकी रूह कांप गई।