आज देश के छठे और सबसे युवा प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की जयंती है। देश में कई बदलावों को लाने वाले राजीव के बारे में कई ऐसी बातें हैं जो आप नहीं जानते होंगे। जैसे किसी एक खास ब्रांड के लिए उनका प्यार और उनकी मौत के बाद उसी ब्रांड का उनके शव पहचानने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना वो चीज है जो बहुत कम लोगों को पता है।
जिस ब्रांड को राजीव गांधी ने भारत में किया फेमस उसी से पहचाना गया उनका शव, 5 फैक्ट
1-इंजीनियर से बने पायलट फिर बन गए राजनेता- लंदन में अपनी ए-लेवल की पढ़ाई करने के बाद राजीव इंजीनियरिंग करने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के ट्रिनिटी कॉलेज चले गए। हालांकि यहां तीन साल की पढ़ाई के बाद भी वह डिग्री हासिल नहीं कर सके। इसके बाद वह लंदन के इम्पीरियल कॉलेज इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए गए लेकिन वहां भी पढ़ाई पूरी न कर सके। बाद में उन्होंने दिल्ली का फ्लाइंग क्लब ज्वाइन कर लिया और पायलट बन गए। सिमी ग्रेवाल को दिए एक इंटरव्यू में राजीव ने बताया था कि उन्होंने पायलट बनने का चस्का तब लगा जब वो पंडित नेहरू के साथ ग्लाइडिंग क्लब गए थे।
2-एक जुनूनी फोटोग्राफर- बहुत कम लोगों को पता होगा कि राजीव को फोटोग्राफी का भी बहुत शौक था। यह बात शायद आपको न पता हो कि जब वो जिंदा थे तो कई पब्लिशर ने उन्हें फोटोग्राफी पर बुक लिखने को कहा था लेकिन ऐसा न हुआ। उनकी मौत के बाद सोनिया गांधी ने राजीव वर्ल्डः फोटोग्राफ बाई राजीव गांधी किताब प्रकाशित करवाई। इस किताब में वो तस्वीरें हैं जो राजीव गांधी ने चार दशकों में खींची थीं। इसे एक तरह से राजीव की बायोग्राफी ही माना जाता है क्योंकि इसमें वो सभी तस्वीरें हैं जो राजीव ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण पलों में खींची थीं। सोनिया गांधी ने इस किताब में लिखा है कि राजीव सबसे ज्यादा अपने परिवार और पेट्स की तस्वीरें खींचते थे। सोनिया ने ये भी लिखा है कि वैसे तो सोनिया को फोटो खिंचवाना पसंद नहीं था लेकिन जब राजीव खींचते थे तो उन्हें कोई परेशानी नहीं होती थी।
3-खुद चलाते थे कार- शायद राजीव एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो अपनी कार खुद चलाते थे। यहां तक कि चुनावी कैंपेन के दौरान भी वो अपनी कार खुद ही चलाते थे। इस बारे में सुमन चट्टोपाध्याय ने अपनी किताब माई डेट विद हिस्ट्रीः ए मेमॉयर में लिखा है कि वह स्पोर्ट रेसर ड्राइवर की तरह कार चलाते थे। कभी-कभी तो वह इतनी तेज कार चलाते थे कि उनकी सिक्योरिटी में चल रही कारें बहुत पीछे छूट जाती थीं।
4-मां की मौत के बाद नहीं भाई की मौत के बाद मिली थी राजनीति में आने की पहली बार सलाह- जब संजय गांधी एक प्लेन क्रैश में मारे गए थे तो सांत्वना देने के लिए बद्रीनाथ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी भी इंदिरा गांधी से मिले थे। तब उन्होंने इंदिरा को सलाह दी थी कि राजीव से कहिए वह प्लेन उड़ाना छोड़ दे। तब इंदिरा गांधी ने उनसे कहा था कि अगर वो प्लेन उड़ाना छोड़ देगा तो अपने परिवार का पालन कैसे करेगा। तब शंकराचार्य ने कहा था कि जो इंसान भगवान की सेवा में खुद को समर्पित करता है उसे भगवान संभालते हैं। मेरा मानना है कि राजीव को देश की सेवा में लगना चाहिए। इसके बाद लगातार राजनेता चाहते थे कि इंदिरा राजीव को राजनीति में लाएं पर इंदिरा ने इसका निर्णय राजीव पर छोड़ रखा था। फिर आखिरकार राजीव को मां की मौत के बाद न चाहते हुए भी राजनीति में आना पड़ा।