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Delhi NCR News: सिल्वर जुबली पर द्वादश ज्योतिर्लिंग थीम पर सजेगा पंडाल
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। आस्था के 25 वर्ष पूरे होने पर लक्ष्मी नगर का दिल्ली का महाराजा इस बार गणेश उत्सव को भारत की विकास यात्रा से जोड़ेगा। श्री गणेश सेवा मंडल की ओर से 14 से 25 सितंबर तक आयोजित होने वाले सिल्वर जुबली गणेश महोत्सव की थीम विघ्नहर्ता से विकासकर्ता-25 वर्ष की आस्था, 2047 विकसित भारत का संकल्प रखी गई है।
महोत्सव स्थल पर द्वादश ज्योतिर्लिंगों की थीम पर पंडाल तैयार किया जाएगा। इसके केंद्र में केदारनाथ मंदिर की प्रस्तुति होगी। वहीं गणपति के हाथों में मेड इन इंडिया ड्रोन, ब्रह्मोस मिसाइल और सेमीकंडक्टर देश की वैज्ञानिक और तकनीकी आत्मनिर्भरता का संदेश देंगे। पंडाल में ज्ञान परंपरा से लेकर अंतरिक्ष, रक्षा, एआई, रोबोटिक्स और डिजिटल इंडिया तक की झांकियों के जरिए भारत की विकास यात्रा और भविष्य की तस्वीर दिखाई जाएगी।
आयोजकों के मुताबिक, 14 सितंबर को अनेकता में एकता की थीम पर कलश शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसमें 52 महिलाएं 52 कलशों के साथ शक्तिपीठों का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करेंगी। गंगौर, छठ, गरबा-डांडिया, दुर्गा पूजा, वारी और रामायण समेत विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक परंपराएं भी प्रदर्शित की जाएंगी। प्रतिदिन महाआरती के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। स्वास्थ्य जांच, मैमोग्राफी और रक्तदान शिविर के साथ दिव्यांगों और वरिष्ठ नागरिकों को उपयोगी उपकरण भी वितरित किए जाएंगे।
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नई दिल्ली। आस्था के 25 वर्ष पूरे होने पर लक्ष्मी नगर का दिल्ली का महाराजा इस बार गणेश उत्सव को भारत की विकास यात्रा से जोड़ेगा। श्री गणेश सेवा मंडल की ओर से 14 से 25 सितंबर तक आयोजित होने वाले सिल्वर जुबली गणेश महोत्सव की थीम विघ्नहर्ता से विकासकर्ता-25 वर्ष की आस्था, 2047 विकसित भारत का संकल्प रखी गई है।
महोत्सव स्थल पर द्वादश ज्योतिर्लिंगों की थीम पर पंडाल तैयार किया जाएगा। इसके केंद्र में केदारनाथ मंदिर की प्रस्तुति होगी। वहीं गणपति के हाथों में मेड इन इंडिया ड्रोन, ब्रह्मोस मिसाइल और सेमीकंडक्टर देश की वैज्ञानिक और तकनीकी आत्मनिर्भरता का संदेश देंगे। पंडाल में ज्ञान परंपरा से लेकर अंतरिक्ष, रक्षा, एआई, रोबोटिक्स और डिजिटल इंडिया तक की झांकियों के जरिए भारत की विकास यात्रा और भविष्य की तस्वीर दिखाई जाएगी।
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आयोजकों के मुताबिक, 14 सितंबर को अनेकता में एकता की थीम पर कलश शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसमें 52 महिलाएं 52 कलशों के साथ शक्तिपीठों का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करेंगी। गंगौर, छठ, गरबा-डांडिया, दुर्गा पूजा, वारी और रामायण समेत विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक परंपराएं भी प्रदर्शित की जाएंगी। प्रतिदिन महाआरती के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। स्वास्थ्य जांच, मैमोग्राफी और रक्तदान शिविर के साथ दिव्यांगों और वरिष्ठ नागरिकों को उपयोगी उपकरण भी वितरित किए जाएंगे।
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