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Delhi NCR News: जब सात शास्त्रीय नृत्य शैलियों ने एक मंच पर रचा सुर-लय का संसार
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। भारतीय शास्त्रीय नृत्य की सात अलग-अलग धाराएं बृहस्पतिवार शाम इंडिया हैबिटेट सेंटर के स्टीन सभागार में एक मंच पर उतरीं तो पूरा परिसर देश की सांस्कृतिक विविधता के रंग में रंग गया। श्रुति प्रदर्शन मंडली की ओर से आयोजित इस विशेष नृत्य संध्या में कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के जरिए भाव, लय और देह की भाषा में भारतीय परंपराओं की खूबसूरती को सामने रखा।
कार्यक्रम की शुरुआत भरतनाट्यम की गंभीरता और अनुशासन के साथ हुई। मौमिता चटर्जी ने भाव और मुद्राओं की बारीकियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। इसके बाद नीलाक्षी खांडेकर की कथक प्रस्तुति में घुंघरुओं की रुनझुन और पैरों की थाप के साथ लय ने गति पकड़ी। भावपूर्ण मुद्राओं ने कथक की नजाकत और ऊर्जा को मंच पर जीवंत कर दिया।
अनुशुआ चौधरी ने ओडिसी की कोमल भंगिमाओं और सौंदर्यपूर्ण मुद्राओं से दर्शकों को प्रभावित किया। वहीं सोमाभा बंदोपाध्याय की मणिपुरी प्रस्तुति में भक्ति और सहजता का भाव देखने को मिला। बिराज रॉय ने सत्त्रिया नृत्य के जरिए असम की सांस्कृतिक परंपरा की झलक दिखाई।
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दक्षिण भारत की दो प्रमुख नृत्य शैलियों ने भी कार्यक्रम में अपनी खास छाप छोड़ी। श्रीमोयी घोष ने मोहिनीअट्टम की लास्यपूर्ण भंगिमाओं से मंच पर कोमलता बिखेरी, जबकि संदीप कुंडू की कुचिपुड़ी प्रस्तुति में गति, चपलता और भावों का सुंदर मेल देखने को मिला। सातों प्रस्तुतियों ने मिलकर भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को एक सूत्र में पिरो दिया।
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नई दिल्ली। भारतीय शास्त्रीय नृत्य की सात अलग-अलग धाराएं बृहस्पतिवार शाम इंडिया हैबिटेट सेंटर के स्टीन सभागार में एक मंच पर उतरीं तो पूरा परिसर देश की सांस्कृतिक विविधता के रंग में रंग गया। श्रुति प्रदर्शन मंडली की ओर से आयोजित इस विशेष नृत्य संध्या में कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के जरिए भाव, लय और देह की भाषा में भारतीय परंपराओं की खूबसूरती को सामने रखा।
कार्यक्रम की शुरुआत भरतनाट्यम की गंभीरता और अनुशासन के साथ हुई। मौमिता चटर्जी ने भाव और मुद्राओं की बारीकियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। इसके बाद नीलाक्षी खांडेकर की कथक प्रस्तुति में घुंघरुओं की रुनझुन और पैरों की थाप के साथ लय ने गति पकड़ी। भावपूर्ण मुद्राओं ने कथक की नजाकत और ऊर्जा को मंच पर जीवंत कर दिया।
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अनुशुआ चौधरी ने ओडिसी की कोमल भंगिमाओं और सौंदर्यपूर्ण मुद्राओं से दर्शकों को प्रभावित किया। वहीं सोमाभा बंदोपाध्याय की मणिपुरी प्रस्तुति में भक्ति और सहजता का भाव देखने को मिला। बिराज रॉय ने सत्त्रिया नृत्य के जरिए असम की सांस्कृतिक परंपरा की झलक दिखाई।
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दक्षिण भारत की दो प्रमुख नृत्य शैलियों ने भी कार्यक्रम में अपनी खास छाप छोड़ी। श्रीमोयी घोष ने मोहिनीअट्टम की लास्यपूर्ण भंगिमाओं से मंच पर कोमलता बिखेरी, जबकि संदीप कुंडू की कुचिपुड़ी प्रस्तुति में गति, चपलता और भावों का सुंदर मेल देखने को मिला। सातों प्रस्तुतियों ने मिलकर भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को एक सूत्र में पिरो दिया।