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Delhi NCR News: प्रकृति के टूटते सुरों से फिर सामंजस्य की ओर ले गया कथक
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संपादक जी के ध्यानार्थ
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। आधुनिकता की अंधी दौड़ में प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है। ऐसे समय में कथक के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने की अनूठी पहल प्रख्यात कथक नृत्यांगना पद्मश्री शोवना नारायण ने की। कमानी सभागार में बृहस्पतिवार शाम उनकी असावरी रेपर्टरी की प्रस्तुति फ्रैक्चर्ड हार्मनीज में नृत्य, संगीत, रंगमंच और दृश्य कला के माध्यम से पर्यावरणीय संकट को मंच पर जीवंत किया गया।
नृत्यांगनाओं की पैरों की थाप, चक्कर और भाव-भंगिमाओं के जरिए बादलों की गरज, बिजली की कड़क, बहती नदी और पक्षियों की चहचहाहट को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति में पानी, जंगल, जमीन और अंतरिक्ष में बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप के दुष्प्रभावों को सामने रखा गया। पर्यावरण विनाश का महिलाओं और समाज के कमजोर वर्गों पर पड़ने वाले असर को भी रेखांकित किया गया। प्रस्तुति के बाद खचाखच भरे सभागार में दर्शकों ने खड़े होकर कलाकारों का अभिवादन किया।
प्रस्तुति चार हिस्सों में आगे बढ़ी। लामेंट ऑफ द एज्योर में नदियों और समुद्रों में बढ़ते प्रदूषण तथा प्लास्टिक और मछली पकड़ने के जाल में फंसते जलीय जीवों की पीड़ा दिखाई गई। दिशांतर में जंगलों की कटाई, शोषण, असमानता और महिलाओं के हाशिए पर जाने की कहानी सामने आई। एकोज इन द वॉइड ने अंतरिक्ष में बढ़ते कचरे के खतरे की ओर ध्यान खींचा। अंतिम प्रस्तुति रिस्टोरिंग नेचर्स हार्मनी में विनाश के बजाय पुनर्निर्माण, स्वच्छ ऊर्जा और सामूहिक जिम्मेदारी की उम्मीद दिखाई गई। सूर्य, हवा और पानी को जीवन के पुनर्जागरण की शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया।
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शोवना नारायण ने कहा कि पर्यावरण का विषय उनके दिल के बेहद करीब है। नृत्य के जरिए उन्होंने अपने समय की गंभीर चिंताओं से संवाद करने का प्रयास किया है। प्रस्तुति के साथ सभागार के बाहर पर्यावरण केंद्रित चित्रों की प्रदर्शनी भी लगाई गई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। आधुनिकता की अंधी दौड़ में प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है। ऐसे समय में कथक के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने की अनूठी पहल प्रख्यात कथक नृत्यांगना पद्मश्री शोवना नारायण ने की। कमानी सभागार में बृहस्पतिवार शाम उनकी असावरी रेपर्टरी की प्रस्तुति फ्रैक्चर्ड हार्मनीज में नृत्य, संगीत, रंगमंच और दृश्य कला के माध्यम से पर्यावरणीय संकट को मंच पर जीवंत किया गया।
नृत्यांगनाओं की पैरों की थाप, चक्कर और भाव-भंगिमाओं के जरिए बादलों की गरज, बिजली की कड़क, बहती नदी और पक्षियों की चहचहाहट को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति में पानी, जंगल, जमीन और अंतरिक्ष में बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप के दुष्प्रभावों को सामने रखा गया। पर्यावरण विनाश का महिलाओं और समाज के कमजोर वर्गों पर पड़ने वाले असर को भी रेखांकित किया गया। प्रस्तुति के बाद खचाखच भरे सभागार में दर्शकों ने खड़े होकर कलाकारों का अभिवादन किया।
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प्रस्तुति चार हिस्सों में आगे बढ़ी। लामेंट ऑफ द एज्योर में नदियों और समुद्रों में बढ़ते प्रदूषण तथा प्लास्टिक और मछली पकड़ने के जाल में फंसते जलीय जीवों की पीड़ा दिखाई गई। दिशांतर में जंगलों की कटाई, शोषण, असमानता और महिलाओं के हाशिए पर जाने की कहानी सामने आई। एकोज इन द वॉइड ने अंतरिक्ष में बढ़ते कचरे के खतरे की ओर ध्यान खींचा। अंतिम प्रस्तुति रिस्टोरिंग नेचर्स हार्मनी में विनाश के बजाय पुनर्निर्माण, स्वच्छ ऊर्जा और सामूहिक जिम्मेदारी की उम्मीद दिखाई गई। सूर्य, हवा और पानी को जीवन के पुनर्जागरण की शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया।
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शोवना नारायण ने कहा कि पर्यावरण का विषय उनके दिल के बेहद करीब है। नृत्य के जरिए उन्होंने अपने समय की गंभीर चिंताओं से संवाद करने का प्रयास किया है। प्रस्तुति के साथ सभागार के बाहर पर्यावरण केंद्रित चित्रों की प्रदर्शनी भी लगाई गई।