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जवाहर हत्याकांड: चेहरे पर थी मुस्कान पर आंखें बयां कर रहीं थीं दर्द, ऐसा था करवरिया बंधु का हाल
Tue, 05 Nov 2019 12:07 PM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 05 Nov 2019 12:07 PM IST
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jawahar yadav murder case
- फोटो : अमर उजाला
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जवाहर हत्याकांड में उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के दौरान कपिल मुनि करवरिया, उदयभान करवरिया और सूरजभान करवरिया पूरी तरह से सामान्य दिख रहे थे। उनके चेहरों पर मुस्कान थी मगर आंखों से आत्मविश्वास की वह चमक गायब थी, जो इससे पहले नजर आती थी।
सजा सुनाए जाने के बाद पूर्व विधायक उदयभान
- फोटो : अमर उजाला
करवरिया बंधु जितनी देर भी अदालत परिसर में रहे, समर्थकों से मुस्कराकर और हंसकर बात करते रहे मगर चंद क्षणों की चुप्पी होते ही चिंता की गहरी लकीरें उनके चेहरे पर उभर आती थीं। पूरे समय यही क्रम चलता रहा।
पूर्व एमएलसी सूरजभान
- फोटो : अमर उजाला
यूं तो तीनों भाई समर्थकों को ढांढस देते रहे थे मगर, उनको भी शायद यह पता था कि उनके साथ क्या हो चुका है। सजा तो 31 अक्तूबर को दोषसिद्ध साबित होते ही तय हो चुकी थी। कितनी सजा मिलनी है यह जानना बाकी थी। यह भी एक बजह थी कि उन्होंने खुद को संभाले रखा था क्योंकि उनको भी पता था कि जो होना था हो चुका है।
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बसपा के पूर्व सांसद कपिल मुनि
- फोटो : अमर उजाला
खचाखच भरा रहा कोर्ट रूम
सजा सुनाए जाने की कार्रवाई देखने के लिए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (स्पेशल जज गैंगस्टर) कक्ष संख्या पांच में दिन में एक बजे से ही वकील और समर्थक पहुंचने लगे। हालांकि कोर्ट रूम के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मियों को वकीलों को छोड़कर और किसी को भीतर नहीं जाने दिया। वकील ही इतनी बड़ी संख्या में थे कि पूरे कोर्ट रूम में तिल रखने भर की जगह नहीं थी।
सजा सुनाए जाने की कार्रवाई देखने के लिए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (स्पेशल जज गैंगस्टर) कक्ष संख्या पांच में दिन में एक बजे से ही वकील और समर्थक पहुंचने लगे। हालांकि कोर्ट रूम के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मियों को वकीलों को छोड़कर और किसी को भीतर नहीं जाने दिया। वकील ही इतनी बड़ी संख्या में थे कि पूरे कोर्ट रूम में तिल रखने भर की जगह नहीं थी।
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पूर्व विधायक उदयभान और पूर्व एमएलसी सूरज भान
- फोटो : अमर उजाला
दिन में करीब तीन बजे जब करवरिया बंधुओं को जेल से लाया गया तो उनको कोर्ट रूम के भीतर ले जाने में सुरक्षाकर्मियों को खासी मशक्कत करनी पड़ी। चारों अभियुक्तों को कटघरे के बजाए सीधे डायस के पास ले जाया गया। चूंकि फैसले पर अभियुक्तों के हस्ताक्षर भी लेने थे इसलिए भीड़ को देखते हुए कटघरे में खड़ा करने का निर्णय बदलना पड़ा।