जैन मुनि तरुण सागर का आज निधन हो गया है। वो पिछले करीब 20 दिन से बीमार चल रहे थे। पीलिया होने के बाद तरुण सागर को मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। काफी इलाज के बाद भी सेहत में सुधार नहीं हुआ। उन्होंने खाना-पीना छोड़ दिया था। काफी कमजोर भी हो गए थे। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बाद भी उनकी तबीयत में सुधार नहीं हुआ।
तरुण सागर का असली नाम नाम पवन कुमार जैन था, मध्यप्रदेश के दमोह जिले के गुहजी गांव में उनका जन्म 26 जून 1967 को हुआ था। बताया जाता है कि उन्होंने 14 साल की उम्र में 8 मार्च 1981 को अपना घर त्याग दिया था। छत्तीससगढ़ में उनकी शिक्षा दीक्षा हुई।तरुण सागर को प्रवचन की वजह से जाना जाता था। इसलिए उन्हें 'क्रांतिकारी संत' का तमगा मिला था।
यह भी पढ़ेंः तरुण सागर ने घर छोड़ते वक्त कही थी ये बड़ी बात, आज हो रही है सच
आइए जानते उनके सात कड़वे वचनों के बारे में
एक बयान में उन्होंने कहा था कि अगर तुम्हारी वजह से कोई इंसान दुखी रहे, तो समझ लिजिए कि यह तुम्हारे लिए सबसे बड़ा पाप है, ऐसे काम करो कि लोग तुम्हारे जाने के बाद दुखी हो और आसूं बहाए, तभी तुम्हें पुण्य मिलेगा।
इसके अलावा उन्होंने कहा था कि गुलाब कांटों में भी हंसता है, इसलिए लोग गुलाब को प्रेम करते हैं। तुम भी ऐसे काम करो कि नफरत करने वाले लोग भी तुमसे प्रेम करने के लिए मजबूर हो जाएं।
5 of 9
मुनि तरुण सागर
- फोटो : file
जैन मुनि ने कहा था कि मनुष्य को ही हंसने का गुण मिला है, इसलिए जब भी मौका मिले हंसिये, कुत्ता चाहकर भी हंस नहीं सकता।