गाजियाबाद जिले के मुरादनगर के गांव बसंतपुर सैंथली के शातिर किसान लीलू त्यागी ने 20 साल में एक-एक कर पांच परिजनों की जान ले ली। चार करोड़ की संपत्ति के लिए उसने रिश्तों का खून इतनी सफाई से किया कि किसी को भनक तक नहीं लगी। तीन के खून से उसने अपने हाथ रंगे, जबकि दो का कत्ल सुपारी देकर कराया। डेढ़ माह पहले आठ अगस्त को रिटायर्ड दरोगा सुरेंद्र त्यागी को चार लाख रुपये देकर कराई पांचवीं हत्या के रहस्य से बृहस्पतिवार को पर्दा उठाने के साथ पुलिस ने पांचों वारदात का सिलसिलेवार खुलासा हो जाने का दावा किया है। लीलू, सुरेंद्र और सुपारी किलर राहुल गिरफ्तार कर लिए गए हैं। आपको बता दें कि आरोपी लीलू ने पहले भाई और फिर भतीजी और भतीजों को मारा। मृतकों में भाई सुधीर, बड़ी भतीजी पारुल, छोटी भतीजी पायल, भतीजा नीशू और रेशू त्यागी शामिल हैं।
साजिश ऐसी कि परिजन भी खा गए गच्चा
संपत्ति के लिए लीलू ने ऐसी साजिश रची कि परिजन भी गच्चा खा गए। लीलू एक के बाद एक परिवार के लोगों को मौत के घाट उतारता रहा और ऐसी दलीलें दीं कि परिजनों को थाने तक नहीं जाने दिया। लेकिन पांचवीं हत्या में की गई थोड़ी सी चूक ने उसकी करतूत उजागर कर दी।
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हत्यारोपी लीलू
- फोटो : अमर उजाला
8 अगस्त को रेशू के लापता होने के बाद लीलू उसके पिता ब्रिजेश के साथ उसकी खोजबीन का नाटक करता रहा। उसने रेशू पर भी आरोप-प्रत्यारोप लगाते हुए कहीं चले जाने का हवाला देते हुए मामले को पुलिस में न ले जाने की दलील दी।
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रेशू त्यागी का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
परिजन उसकी बातों में आ गए थे, लेकिन दूसरे व आखिरी बेटे के लापता होने से आहत ब्रिजेश त्यागी ने आखिरकार 15 अगस्त को मुरादनगर थाने में गुमशुदगी दर्ज करा दी।
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आरोपी राहुल
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस ने खूब हाथ-पांव पीटे, लेकिन कोई सुराग नहीं लगा। बुधवार तक पुलिस के पास सिर्फ लीलू और उसके मृतक भतीजे की एक ही स्थान पर लोकेशन के अलावा कोई दूसरा क्लू नहीं था।
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हत्यारोपी रिटायर्ड दरोगा सुरेंद्र त्यागी
- फोटो : अमर उजाला
साक्ष्य न होने के चलते पुलिस भी हत्या का एंगल छोड़ने वाली ही थी कि एक कॉल रिकॉर्डिंग ने लीलू की साजिश बेनकाब कर दी। खुद पुलिस अधिकारियों का मानना है कि अगर यह दोनों सुबूत न मिलते तो पांच हत्याओं का राज हमेशा के लिए दफन हो जाता।