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Ankit Murder Case: पहले गर्दन काटी, फिर दोनों हाथ और पैर किए अलग; आरोपी बोला- कर्ज बहुत था, कोई पछतावा नहीं

Fri, 16 Dec 2022 08:20 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद Published by: शाहरुख खान Updated Fri, 16 Dec 2022 08:20 AM IST
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Ankit Murder Case Police did not find body parts of PhD student Ankit
Ankit Murder Case - फोटो : अमर उजाला
गाजियाबाद के मुरादनगर में एक करोड़ रुपये के लिए की गई पीएचडी के छात्र अंकित खोखर की हत्या के मुख्य आरोपी मकान मालिक उमेश शर्मा और उसके मौसेरे भाई प्रवेश को पुलिस ने बृहस्पतिवार दोपहर कोर्ट में पेश किया। दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस गंगनहर और ईस्टर्न पेरिफेरेल एक्सप्रेसवे पर फेंके गए शव के टुकड़ों को नहीं ढूंढ पाई है। उमेश को रिमांड पर लेकर इन्हें बरामद करने का प्रयास किया जाएगा। उमेश ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उसने चार अक्तूबर मोदीनगर की गोविंदपुरी की दुकान से आरी, राजचौपला से टेप और पॉलिथीन खरीदी थी। उमेश का वजन काफी ज्यादा था, उसके लिए अकेले शव ठिकाने लगाना मुश्किल था। इसलिए, टुकड़े किए। पहले गर्दन काटी फिर दोनों हाथ अलग किए। इसके बाद धड़ के कुछ हिस्से सहित पैर काट दिए। कुल पांच टुकड़े हुए। हाथ और पैर को एक जगह जबकि धड़ और सिर को अलग-अलग पॉलिथीन में पैक किया। 


 
Ankit Murder Case Police did not find body parts of PhD student Ankit
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी - फोटो : अमर उजाला
मुझे कोई पछतावा नहीं
उमेश ने जेल जाने से पहले मोदीनगर थाने में मीडियाकर्मियों के सामने कहा कि उसे कोई पछतावा नहीं है। कर्ज बहुत हो गया था। उसने लोगों से 30 लाख से ज्यादा रुपये ले रखे थे। वे लोग उसे छोड़ते नहीं। 
 
Ankit Murder Case Police did not find body parts of PhD student Ankit
आरोपी उमेश शर्मा - फोटो : अमर उजाला
उनका पैसा लौटाने के लिए हत्या करनी पड़ी। अंकित की हत्या के बाद शव के टुकड़े फेंकने के लिए उमेश उसका ही मोबाइल फोन साथ में लेकर गया। उसने खुद का फोन नहीं रखा। 

 
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Ankit Murder Case Police did not find body parts of PhD student Ankit
आरोपी उमेश शर्मा - फोटो : अमर उजाला
उसने पुलिस को बताया कि ऐसा इसलिए किया क्योंकि उसे मालूम था कि पुलिस फोन को लोकेशन निकालेगी। ऐसे में पुलिस सोचती कि अंकित ही वहां से होकर गुजरा है।

 
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी - फोटो : अमर उजाला
अस्पताल में सीखा आरी चलाना
उमेश ने बताया कि वह दो साल पहले जब हड्डी रोग विशेषज्ञ के यहां कंपाउंडर था, तब प्लास्टर काटने का काम उसी के पास था। वह आरी से प्लास्टर काटता था। इसी से वह आरी चलाने में दक्ष हो गया। हत्या कर शव के टुकड़े करने के लिए उसके दिमाग में आरी ही आई। उसे डॉक्टर ने उसकी गलत आदतों के कारण नौकरी से निकाला था।
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