शाम सवा सात बजे मैं साहब (ब्रजपाल तेवतिया) को लेकर मुरादनगर से निकला। शहर से बाहर सुनसान इलाके में बड़ा ब्रेकर पड़ने पर मैंने अचानक ब्रेक लगाई। सामने फॉर्च्यूनर कार खड़ी थी। उसमें से एक युवक उतरा और एके-47 से हमारी गाड़ी पर अंधाधुंध फायरिंग करने लगा।
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ब्रजपाल तेवतिया पर हमला
- फोटो : अमर उजाला
मैं ड्राइविंग सीट के नीचे झुक गया। हमारी गाड़ी पर करीब एक मिनट तक तड़ातड़ गोलियां बरसती रहीं। इसके बाद गोलियों की आवाज बंद हो गई। मेरे बगल वाली सीट पर बैठे साहब ने आवाज दी-मोहन तू ठीक है।
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ब्रजपाल तेवतिया पर हमला
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मैंने सर उठाकर देखा तो वह लहूलुहान थे जबकि पिछली की सीट पर खून से लथपथ गनर अशोक और रामपाल मूर्छित हो चुके थे। साहब के मित्र इंद्रपाल के सिर में गोली लगने से वह भी अर्द्ध मूर्छित अवस्था थे। साहब बोले-इंद्रपाल पुलिस को फोन करो।
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ब्रजपाल तेवतिया पर हमला
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने तीन बार 100 नंबर पर डायल किया। पुलिस ने फोन नहीं उठाया। तब साहब मुझसे बोले-मोहन तुम गाड़ी चला लोगे। मुझे भी गोली लगी थी, लेकिन मैंने हां कह दिया। वह तुरंत बोले- ले चल सर्वोदय अस्पताल। सामने कोई हमलावर नहीं था। मैंने गाड़ी दौड़ा दी।
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हमले के चश्मदीद
- फोटो : अमर उजाला
रास्ते में साहब बोले-इंद्रपाल, विकास (छोटा भाई) को फोन कर, सर्वोदय में बेड की व्यवस्था करने को कहो। 20 मिनट में हम सर्वोदय पहुंच गए। स्ट्रेचर पर आईसीयू में जाते हुए साहब ने कहा-मोहन तू ठीक है...।