नोट बदलावाने आने वाले हर शख्स की उंगली पर स्याही लगाने के फैसले के बाद से 'हाथ पर लगी स्याही को कैसे मिटाएं' (indelible ink removal ) यह गूगल सर्च के टॉप ट्रेंड में बना हुआ है। मालूम हो कि मंगलवार(15 नवंबर) को भारत के आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांता दास ने घोषणा करते हुए बताया कि अब बैंकों में नोट बदलने आने वाले हर शख्स की उंगली पर स्याही लगाई जाएगी। ये वही स्याही है जो मतदान के समय भी उंगली पर लगाई जाती है। इस घोषणा के बाद से इस इंक को बनाने वाली एकमात्र भारतीय कंपनी मैसूर पेंट्स एंड वार्निश लिमिटेड (एमपीवीएल) ने युद्धस्तर पर स्याही के उत्पादन का काम शुरु कर दिया है। यह कंपनी मैसूर में है। खास बात ये है कि यही कंपनी देश सहित कई अन्य देशों को भी इस स्याही का निर्यात करती है।
स्याही के इस्तेमाल पर उठ रहे हैं ये 4 सवाल, क्या सरकार देगी इनके जवाब
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आर्थिक सचिव दास के अनुसार बुधवार से देश की बैंक शाखाओं में नोट बदलवाने के लिए आने वाले लोगों के दाहिने हाथ की पहली उंगली पर स्याही लगाई जाएगी। इस कदम का मकसद ऐसे लोगों पर लगाम लगाना है जो नोट बदलवाने के लिए कई बार बैंक की लाइनों में लग जाते हैं। सरकार के इस फैसले पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब दिए बिना बैंकों की लाइन को कम करने की यह पहल शायद ही कारगर साबित हो। आगे हम ऐसे ही चार सवाल उठा रहे हैं जिनका जवाब लोग जानना चाहते हैं-
1- आर्थिक मामले के सचिव के पास नहीं है इस तरह की घोषणा का अधिकार: चेन्नई में बैंक अफसरों के प्रतिनिधि फ्रैंको का कहना है कि इकोनॉमिक अफेयर सेक्रेटरी को इस तरह का आदेश देने का अधिकार नहीं है। उन्होंने बताया, 'ऐसे फैसले या तो आरबीआई या वित्तीय सचिव की ओर से आने चाहिए। जो लोग पैसे बदलवाने बैंक आएंगे, बैंक उनकी उंगलियों पर कितने मार्क लगाएगा यह कैसे तय होगा?'
2- कब तक देशभर के बैंकों तक पहुंचेगी स्याही: इस खास स्याही का उत्पादन करने वाली कंपनी एमपीवीएल चुनाव के दौरान ही इस स्याही का उत्पादन करती है। फिलहाल कंपनी के पास इतनी मात्रा में स्याही नहीं है कि पूरे देश के बैंकों को इसकी सप्लाई की जा सके। एमपीवीएल के अधिकारियों के अनुसार बैंकों ने उनसे ये सोचकर संपर्क किया कि उनके पास पहले से इंक का स्टॉक होगा लेकिन ऐसा नहीं है।
3- कैसे होगा इतनी बड़ी मात्रा में इंक का उत्पादनः 1962 से वोटिंग के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली स्याही बनाने वाली कंपनी एमपीवीएल के जनरल मैनेजर सी हरकुमार का कहना है कि कंपनी को इंक उत्पादन के लिए युद्धस्तर पर काम करना होगा। बुधवार सुबह 6 बजे से ही स्याही के उत्पादन का काम शुरु कर दिया जाएगा। आने वाले कुछ दिन कंपनी के लिए बहुत ही चुनौतीपूर्ण रहेंगे और युद्धस्तर पर काम होगा। कंपनी 5 एमएल वाली बोतलों के ज्यादा ऑर्डर आने की उम्मीद कर रही है। हरकुमार ने जानकारी दी कि मंगलवार दोपहर बाद से कई बैंक कंपनी को इंक के लिए संपर्क कर चुके हैं। सवाल यही है कि आखिर इतने बड़े देश को एक कंपनी अचानक से आई इस क्राइसिस से निकाल पाएगी या नहीं।