मौनी अमावस्या पर चार फरवरी को कुंभ क्षेत्र में स्नान करने आई सैकड़ों की संख्या में महिलाएं अपने परिजनों से छूट गईं थी। उनमें से ज्यादातर अभी भी भूले भटके शिविरों में अपनों के आने का इंतजार कर रही हैं। इसी बीच शुक्रवार को एक अच्छी सूचना आई।
मौनी अमावस्या पर संगम स्नान करने के लिए पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले की फुगा गोरांय (45) भी अपने समूह के साथ 2 फरवरी को ही मेले में आ गयी थी। 4 फरवरी को स्नान करने के बाद वह भीड़ में खो गयी। साथ के और लोगो नें पहले स्वयं ढूंढा फिर खोया पाया केंन्द्र जाकर उनका नाम अनाउंस करवाया पर वह केन्द्र तक न पहुंच सकी। गांव से आए लोगों नें कुछ घंटे इंतजार किया और फिर वो वापस चले गए।
हिंदी की जानकारी न होने के कारण फुगा गोरांय दिनभर मेले में परेशान होकर इधर-उधर अपने लोगो को खोज रही थी। किसी तरह खोया पाया केंन्द्र पहुंची। वहां घंटों इंतजार किया पर कोई भी नही आया। रात को पुलिसकर्मियों ने उन्हें सेक्टर 4 स्थित खोए महिलाओं और बच्चों के लिए बनाए गए हेमवती नन्दन बहुगुणा कैम्प ले गए। वह वहां रोती बिलखती रही, जिसके कारण बुखार भी आ गया।
दूसरे दिन अमर उजाला के रिपोर्टर वहां पहुंचे तो वहां मौजूद महिलाओं ने अपनी समस्या बताई, उनकी फोटो ली गयी और अखबार में प्रमुखता के साथ खबर छापी गयी। पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में भतीजे साधुनाथ नें अमर उजाला के वेब पोर्टल (https://www.amarujala.com/) में फोटो देखा और परिवार के लोगो को दिखाया।
पति दिगार गोरांय, भाई राधानाथ और साधुनाथ नें तुरंत ट्रेन पकड़ी और प्रयाग आ गए। वह सबसे पहले उन्हें खोजते-खोजते मेला क्षेत्र के सेक्टर 2 स्थित अमर उजाला के दफ्तर पहुंचे। यहां से और जानकारी इकट्ठा की और फिर गए हेमवती नन्दन बहुगुणा कैम्प जाकर फुगा गोरांय से मिले। परिवार को देखते ही फूगा रोने लगी। यह देखकर पति की भी आंखे भर आयी। परिवार के लोगो नें अमर उजाला को धन्यवाद दिया।