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6 दिन 109 घंटे, 150 फीट गहरे बोरवेल में दो साल का बच्चा, 18 क्लिक में देखिए 'ऑपरेशन फतेहवीर'
Wed, 12 Jun 2019 04:26 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 12 Jun 2019 04:26 PM IST
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ऑपरेशन फतेह
- फोटो : अमर उजाला
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6 दिन, 109 घंटे, 150 फीट गहरा बोरवेल और दो साल के बच्चे को बचाने की कोशिश, जो फेल हो गई। 18 क्लिक करके देखिए कैसे चला 'ऑपरेशन फतेह' और कैसे वो नाकाम हुआ।
ऑपरेशन फतेह
- फोटो : अमर उजाला
10 साल पुराना बोरवेल था, कार निकालने के लिए हटाई थी ईटें
घटना 6 जून दिन वीरवार शाम चार बजे की है। संगरूर जिले में सुनाम के गांव भगवानपुरा निवासी सुखविंदर सिंह का दो साल का बेटा फतेहवीर खेत में बने बोरवेल में गिर गया। 10 साल पुराने बोरवेल को ईटों से ढककर रखा गया था। किसी ने गाड़ी निकालने को ईंटें हटा दी। फिर उसके ऊपर रेत से भरा कट्टा रख दिया गया , लेकिन बारिश पड़ने से वह कमजोर हो चुका था। खेलते-खेलते बच्चे का पैर उस पर आ गया। उसके दबाव से कट्टा बोरवेल में धंसता चला गया और फतेहवीर भी।
घटना 6 जून दिन वीरवार शाम चार बजे की है। संगरूर जिले में सुनाम के गांव भगवानपुरा निवासी सुखविंदर सिंह का दो साल का बेटा फतेहवीर खेत में बने बोरवेल में गिर गया। 10 साल पुराने बोरवेल को ईटों से ढककर रखा गया था। किसी ने गाड़ी निकालने को ईंटें हटा दी। फिर उसके ऊपर रेत से भरा कट्टा रख दिया गया , लेकिन बारिश पड़ने से वह कमजोर हो चुका था। खेलते-खेलते बच्चे का पैर उस पर आ गया। उसके दबाव से कट्टा बोरवेल में धंसता चला गया और फतेहवीर भी।
ऑपरेशन फतेह
- फोटो : अमर उजाला
मां बचाने आई, पर बस छू सकी बेटे को
फतेहवीर के चिल्लाने की आवाज सुनकर मां-बाप दौड़े आए। मां गगनदीप ने भागकर बच्चे को पकड़ने की कोशिश भी की थी, लेकिन वह फतेहवीर को केवल छू ही सकी थीं। उसके हाथ में रद्दी हो चुके कट्टे का टुकड़ा आया। वह इसके लिए खुद को कोस रही है। मैं अपने बच्चे को बचा नहीं सकी, ये कहते हुए वह बार-बार बेहोश हो जाती है। वहीं पिता का भी रो-रोकर बुरा हाल है। वह यही कह रहे हैं कि मैं हाथ धोने न जाता तो फतेहवीर को गिरने से बचा सकता था।
फतेहवीर के चिल्लाने की आवाज सुनकर मां-बाप दौड़े आए। मां गगनदीप ने भागकर बच्चे को पकड़ने की कोशिश भी की थी, लेकिन वह फतेहवीर को केवल छू ही सकी थीं। उसके हाथ में रद्दी हो चुके कट्टे का टुकड़ा आया। वह इसके लिए खुद को कोस रही है। मैं अपने बच्चे को बचा नहीं सकी, ये कहते हुए वह बार-बार बेहोश हो जाती है। वहीं पिता का भी रो-रोकर बुरा हाल है। वह यही कह रहे हैं कि मैं हाथ धोने न जाता तो फतेहवीर को गिरने से बचा सकता था।
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ऑपरेशन फतेह
- फोटो : अमर उजाला
इकलौती संतान था, पांच साल बाद हुआ था
परिजनों ने बताया कि फतेहवीर उनकी इकलौती संतान है। सुखविंदर सिंह और गगनदीप कौर की शादी करीब सात साल पहले हुई थी, जिसके पांच साल बाद कई मन्नतों के बाद फतेहवीर सिंह का जन्म हुआ था। 10 जून को फतेहवीर दो साल का हो गया था। नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (एनडीआरएफ) और डेरा समर्थक टीम (शाह सतनाम फोर्स) ने मोर्चा संभाला हुआ था, लेकिन 109 घंटे तक जिंदगी और मौत से लड़ने के बाद फतेहवीर हार गया।
परिजनों ने बताया कि फतेहवीर उनकी इकलौती संतान है। सुखविंदर सिंह और गगनदीप कौर की शादी करीब सात साल पहले हुई थी, जिसके पांच साल बाद कई मन्नतों के बाद फतेहवीर सिंह का जन्म हुआ था। 10 जून को फतेहवीर दो साल का हो गया था। नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (एनडीआरएफ) और डेरा समर्थक टीम (शाह सतनाम फोर्स) ने मोर्चा संभाला हुआ था, लेकिन 109 घंटे तक जिंदगी और मौत से लड़ने के बाद फतेहवीर हार गया।
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- फोटो : अमर उजाला
एनडीआरएफ की रस्सी से खींचने की कोशिश नाकाम रही
वीरवार को बच्चा गिरा और शुक्रवार को बठिंडा से आई आर्मी की यूनिट ने मोर्चा संभाल लिया। इससे पहले एनडीआरएफ की टीम ने बच्चे के हाथों में रस्सी डालकर उसे बाहर निकालने का प्रयास किया गया,लेकिन सफलता नहीं मिली। बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए प्रशासन को बार-बार योजना बदलनी पड़ रही है। बोर के आसपास करीब चालीस फीट जमीन को खोद दिया गया है और बोर के समानांतर करीब 48 इंची चौड़ा पाइप जमीन में डालने का काम शुरू किया गया।
वीरवार को बच्चा गिरा और शुक्रवार को बठिंडा से आई आर्मी की यूनिट ने मोर्चा संभाल लिया। इससे पहले एनडीआरएफ की टीम ने बच्चे के हाथों में रस्सी डालकर उसे बाहर निकालने का प्रयास किया गया,लेकिन सफलता नहीं मिली। बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए प्रशासन को बार-बार योजना बदलनी पड़ रही है। बोर के आसपास करीब चालीस फीट जमीन को खोद दिया गया है और बोर के समानांतर करीब 48 इंची चौड़ा पाइप जमीन में डालने का काम शुरू किया गया।