गुरुद्वारा पहली पातशाही में दो मंजिला भवन और गुंबद ढहने के बाद पानीपत में अब तक का सबसे बड़ा रेसिक्यू ऑपरेशन चल रहा है। तस्वीरें दर्द की कहानी बयां कर रही हैं।
गुरुद्वारे में लगातार 27 घंटे चले बचाव कार्य में दो और श्रमिकों के शव मिले। इसके साथ ही इस हादसे में मरने वालों की संख्या तीन हो गई है। एक श्रमिक, एक सेवादार और एक पाठी के अभी भी मलबे में दबे होने की आशंका है। एनडीआरएफ को गुंबद के हिलने और ऊपर से गिर रहे मलबे के कारण बचाव कार्य में परेशानी हो रही है।
इस दौरान मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बचाव कार्यों को देखा और मामले की जांच के आदेश दे दिए। इससे गुरुद्वारा प्रबंधन की परेशानी बढ़ सकती हैं। सीएम के जाने के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भी गुरुद्वारे में पहुंचे। उन्होंने मृतकों और घायलों के लिए घोषित की गई राहत राशि को नाकाफी बताया। गुरुद्वारा पहली पातशाही जीटी रोड का दो मंजिला भवन और गुंबद सोमवार शाम करीब साढ़े चार ढह गया था। इसके तुरंत बाद बचाव शुरू कर दिया गया था। यह मंगलवार को दूसरे दिन जारी रहा।
मंगलवार सुबह एनडीआरएफ की एक और कंपनी के साथ ही एनएफएल से सीआईएसएफ की एक कंपनी गुरुद्वारे पहुंच गई। एनडीआरएफ की टीम ने पहली कंपनी से तालमेल बैठाकर बचाव कार्य शुरू कर दिया। सिख समुदाय की संगत भी बचाव कार्यों में लगी रही।
तीन घंटे में निकले दो शव
बचाव कार्य में लगे लोगों को मंगलवार शाम करीब साढ़े चार बजे एक श्रमिक का शव मलबे मिला। शव की शिनाख्त बादशाह उर्फ वाशुदेव (37) निवासी फुंदापुरा उर्फ आटा तहसील बसेरा सिकंदरपुर, बरेली यूपी के रूप में हुई। शाम करीब साढ़े सात बजे दूसरा शव निकाला गया। इसकी शिनाख्त रतिराम उर्फ नन्हे निवासी छेलिया सीतापुर, यूपी के रूप में की। पुलिस ने पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया।