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बीमा कंपनियों की ‘चालाकी’ पर हाईकोर्ट सख्त, एक ऐसा सच आया सामने, जानते नहीं होंगे सभी
Tue, 09 Apr 2019 10:23 AM IST
खुशबू गोयल
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 09 Apr 2019 10:23 AM IST
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बीमा कंपनी
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
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बीमा कंपनियां द्वारा की जाने वाली ‘चालाकी’ पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। दरअसल एक ऐसा सच सामने आया है, जिसके बारे में शायद ही लोग जानते हैं। खबर पढ़ें, सब पता चल जाएगा।
बीमा कंपनी
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
बीमा कंपनियां क्लेम देने से जुड़ी शर्तों को बारीक अक्षरों में लिखती हैं और जब मुआवजा देने की बात आती है तो वे शर्तें दिखाकर अपनी जिम्मेदारी से बच जाती हैं। पंजाब- हरियाणा हाईकोर्ट ने एक मामले पर संज्ञान लेते हुए यह टिप्पणी की। इसके अलावा हाईकोर्ट ने इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (आईआरडीए) को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है।
बीमा कंपनी
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
मामला बीमा क्लेम से जुड़ा हुआ है। पंजाब के कपूरथला निवासी व्यक्ति ने 20 लाख 30 हजार का हाउसिंग लोन लिया था। व्यक्ति की मौत के बाद बीमा के तहत लोन राशि की सेटलमेंट की जानी थी। जब उसकी पत्नी ने इसके लिए आवेदन किया तो उसे बताया गया कि बीमा उसके पति का नहीं, बल्कि उसका किया गया था। महिला ने इसके खिलाफ शिकायत दी, जिसके आधार पर बीमा कंपनी के एजेंट व अन्य पर धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज की गई।
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बीमा कंपनी
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
इस एफआईआर को खारिज करने की अपील लेकर एजेंट ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने जमानत दिए जाने की मांग पर पंजाब सरकार व अन्य को नोटिस जारी करके जवाब मांग लिया। सुनवाई के दौरान दलीलों में जब शर्तों को लेकर बात हुई तो पता चला कि शर्तें इतने बारीक अक्षरों में लिखी थीं कि याची के वकील भी इसे सही तरह से नहीं पढ़ पा रहे थे। साथ ही बीमा लाभ न देने की स्थितियां भी पॉलिसी में सही स्थान पर नहीं थी। इस पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए आईआरडीए को नोटिस जारी कर प्रतिवादी बना लिया।
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बीमा कंपनी
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
चार निर्देश अनिवार्य करने पर मांगा जवाब
हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न बीमा कंपनियों के लिए चार निर्देश अनिवार्य किए जाएं। हाईकोर्ट ने जो चार निर्देश दिए हैं वे इस प्रकार हैं- कोई भी पॉलिसी टाइम्स न्यू रोमन या इससे मिलते हुए किसी फॉन्ट के 12 साइज से कम में न छापी जाए। जहां पर भी पॉलिसी का लाभ देने की स्थितियां व शर्तें बोल्ड लेटर्स में पॉलिसी में लिखी जाएं। किस स्थिति में बीमा लाभ नहीं दिया जाएगा, यह पहले पन्ने पर व कवर नोट में दर्ज किया जाए। पॉलिसी के कवर नोट में साफ और बड़े अक्षरों में यह लिखा जाए कि बीमा कंपनी का एजेंट या अधिकारी कोई अतिरिक्त लाभ देने का वादा करने के लिए अधिकृत नहीं है।
हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न बीमा कंपनियों के लिए चार निर्देश अनिवार्य किए जाएं। हाईकोर्ट ने जो चार निर्देश दिए हैं वे इस प्रकार हैं- कोई भी पॉलिसी टाइम्स न्यू रोमन या इससे मिलते हुए किसी फॉन्ट के 12 साइज से कम में न छापी जाए। जहां पर भी पॉलिसी का लाभ देने की स्थितियां व शर्तें बोल्ड लेटर्स में पॉलिसी में लिखी जाएं। किस स्थिति में बीमा लाभ नहीं दिया जाएगा, यह पहले पन्ने पर व कवर नोट में दर्ज किया जाए। पॉलिसी के कवर नोट में साफ और बड़े अक्षरों में यह लिखा जाए कि बीमा कंपनी का एजेंट या अधिकारी कोई अतिरिक्त लाभ देने का वादा करने के लिए अधिकृत नहीं है।