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Chandigarh News: पीजीआई में खराब आईजीआरटी मशीन की मरम्मत शुरू, 10 दिन में इलाज बहाल होने की उम्मीद
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चंडीगढ़। पीजीआई के रेडियोथेरेपी विभाग में खराब पड़ी इमेज-गाइडेड रेडिएशन थेरेपी (आईजीआरटी) मशीन को दोबारा शुरू करने की कवायद तेज हो गई है। कैंसर मरीजों की परेशानी को देखते हुए पीजीआई प्रशासन ने रविवार के अवकाश के बावजूद चेन्नई से इंजीनियर बुलाया। इंजीनियर सोमवार दोपहर पीजीआई पहुंचा और करीब तीन बजे से मशीन की मरम्मत का काम शुरू कर दिया। प्रशासन को उम्मीद है कि करीब 10 दिन में मशीन पर मरीजों का इलाज दोबारा शुरू हो सकेगा।
करीब 13 साल पुरानी इस हाईटेक मशीन की हार्ड डिस्क खराब होने से रेडिएशन प्रभावित हुआ था। मशीन बंद होने के बाद इस पर इलाज करा रहे मरीजों को विभाग की अन्य मशीनों पर शिफ्ट करना पड़ा, जिससे वहां मरीजों का दबाव बढ़ गया था। अमर उजाला ने 30 अगस्त के अंक में ‘इमेज-गाइडेड रेडिएशन थेरेपी मशीन ठप, कैंसर मरीज दूसरी मशीनों पर शिफ्ट’ शीर्षक से खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी।
चेन्नई से पहुंचे इंजीनियर मशीन के तकनीकी हिस्सों की जांच कर रहे हैं। मरम्मत के दौरान कितनी हार्ड डिस्क और अन्य उपकरणों की जरूरत होगी, इसकी रिपोर्ट प्रशासन को दी जाएगी। इसके बाद जरूरी उपकरण खरीदने की प्रक्रिया शुरू होगी।
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दबाव कम होने की उम्मीद
पीजीआई प्रशासन के अनुसार उपकरण समय पर मिल गए तो करीब 10 दिन में मशीन चालू हो सकती है। इसके बाद रेडियोथेरेपी विभाग की अन्य मशीनों पर बढ़ा दबाव कम होगा और नए मरीजों को इलाज की तारीख मिलने में भी राहत मिल सकेगी।
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करीब 13 साल पुरानी इस हाईटेक मशीन की हार्ड डिस्क खराब होने से रेडिएशन प्रभावित हुआ था। मशीन बंद होने के बाद इस पर इलाज करा रहे मरीजों को विभाग की अन्य मशीनों पर शिफ्ट करना पड़ा, जिससे वहां मरीजों का दबाव बढ़ गया था। अमर उजाला ने 30 अगस्त के अंक में ‘इमेज-गाइडेड रेडिएशन थेरेपी मशीन ठप, कैंसर मरीज दूसरी मशीनों पर शिफ्ट’ शीर्षक से खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी।
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चेन्नई से पहुंचे इंजीनियर मशीन के तकनीकी हिस्सों की जांच कर रहे हैं। मरम्मत के दौरान कितनी हार्ड डिस्क और अन्य उपकरणों की जरूरत होगी, इसकी रिपोर्ट प्रशासन को दी जाएगी। इसके बाद जरूरी उपकरण खरीदने की प्रक्रिया शुरू होगी।
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दबाव कम होने की उम्मीद
पीजीआई प्रशासन के अनुसार उपकरण समय पर मिल गए तो करीब 10 दिन में मशीन चालू हो सकती है। इसके बाद रेडियोथेरेपी विभाग की अन्य मशीनों पर बढ़ा दबाव कम होगा और नए मरीजों को इलाज की तारीख मिलने में भी राहत मिल सकेगी।