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Mother's Day 2019: ये मां हैं 'बेहद स्पेशल', बनीं गुरु तो बेटियों ने भी छू लिया बुलंदियों का आसमान

Sun, 12 May 2019 01:42 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 12 May 2019 01:42 AM IST
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Mother's Day 2019, story of mothers who gurus of their Daughters
Mother's Day 2019

साल का एक दिन सिर्फ मां के नाम होता है, जिसे मदर्स डे कहते हैं।  इस बार मदर्स डे 12 मई यानी आज है। यह दिन मां के लिए बेहद खास है। इस दिन मां को सम्मान और ढेर सारा प्यार और तोहफे दिए जाते हैं। वैसे तो मां को हर दिन प्यार किया जाता है। चंडीगढ़ में भी कुछ ऐसी ही बेटियां हैं जिन्होंने मां की गोद में खेलना कूदना सीखा और बड़ी हुईं तो उसी मां को अपना गुरु बना लिया। मां की सरपरस्ती में पली बढ़ीं ये बेटियां अब आसमां की ऊंचाइयों को छू रही हैं।   

सीक्रेट है तोहफा

Mother's Day 2019, story of mothers who gurus of their Daughters
तैराक चाहत अरोड़ा अपनी मां के साथ

देश और विदेश में तैराकी में भारत का नाम रोशन करने वाली तैराक चाहत अरोड़ा ने कहा कि वह जिस मुकाम पर हैं उसकी वजह हैं उनकी मां। बिना उनकी मेहनत के वह एक बेहतरीन तैराक नहीं बन सकती थीं। बचपन से ही चाहत का रुझान तैराकी में था। 
परिवार ने उनके शौक को देखते हुए उन्हें तैराकी सिखाई। चाहत अरोड़ा ने कहा कि मेरी मां गीता अरोड़ा पिछले कई सालों से मेरे साथ हर दिन अभ्यास करवाने के लिए साथ रहती हैं। कई बार विदेशों में भी वह मेरे साथ रहीं। मदर्स डे पर उनके लिए कुछ खास प्लान है जो कि सीक्रेट है।

Mother's Day 2019, story of mothers who gurus of their Daughters
तानिया भाटिया और उनकी मां
मां की बदौलत राष्ट्रीय टीम में 
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सदस्य बनाने में मेरी मां का महत्वपूर्ण योगदान है। उनकी तपस्या का नतीजा है कि मैं नेशनल वुमन टीम का अहम हिस्सा बन चुकी हूं। यह कहना है तानिया भाटिया का। विकेट कीपर और बल्लेबाज तानिया भाटिया ने कहा कि छोटी सी उम्र में उन्होंने जब क्रिकेट खेलना शुरू किया तो उनकी मां रोजाना उनको सेक्टर 8 स्थित डीएवी स्कूल में अभ्यास के लिए लेकर जाती थीं। 
 
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Mother's Day 2019, story of mothers who gurus of their Daughters
शूटर अंजुम मोदगिल
वहीं से क्रिकेट के प्रति रुचि बढ़ी। सुबह स्कूल छोड़ना और उसके बाद दोपहर में स्कूल के बाद क्रिकेट की कोचिंग लेकर जाती थीं। सर्दी हो या गर्मी अभ्यास के पूरे समय मां मैदान में बैठी रहती थीं। 
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Mother's Day 2019

मेरी मां ही मेरी पहली गुरु
इंटरनेशनल शूटर अंजुम मोदगिल अपनी मां शुभ मोदगिल को अपना गुरु मानती हैं। अंजुम ने कहा कि उनकी मां भी एनसीसी की शूटर थीं। वह कभी-कभी अपने साथ मुझे शूटिंग रेंज लेकर जाती थीं। वहीं से मुझे इस खेल के प्रति लगाव हो गया।

शूटिंग के बारे में पहली जानकारी मेरी मां ने ही दी। उन्होंने शुरू में मुझे निशाना लगाना सिखाया। इसके बाद इस खेल में आगे बढ़ने की हिम्मत जगी। हर कदम पर मेरी मां ने मेरी सहायता की। शूटिंग प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के दौरान वह कई बार वहां रहीं।

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