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सियाचिन को कब्जाने वाले बहादुर का निधन, 91 वर्ष की उम्र में पीएन हूण ने ली आखिरी सांस

Tue, 07 Jan 2020 01:47 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 07 Jan 2020 01:47 AM IST
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Lieutenant General Prem Nath Hoon passes away
लेफ्टिनेंट जनरल प्रेम नाथ हूण का फाइल फोटो। - फोटो : फाइल फोटो

भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल प्रेम नाथ हूण का सोमवार शाम ब्रेन हैमरेज की वजह से निधन हो गया। वे 91 वर्ष के थे। उनका अंतिम संस्कार मंगलवार दोपहर 3.30 बजे सेक्टर 25 के श्मशानघाट में होगा। चार दशकों तक भारतीय सेना की सेवा करने वाले हूण साल 1987 में पश्चिमी कमान प्रमुख के रूप में सेवानिवृत्त हुए थे। 

Lieutenant General Prem Nath Hoon passes away
Prem Nath Hoon - फोटो : फाइल फोटो

साल 2013 में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। उस समय चर्चा थी कि वे लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। पाकिस्तान के एबटाबाद में जन्मे हूण की पहचान तेज तर्रार कमांडर के रूप में थी। भारतीय सेना की ओर से सियाचिन ग्लेशियर को कब्जा करने के लिए शुरू किए गए ‘ऑपरेशन मेघदूत’ की अगुवाई जनरल हूण ने की थी।

Lieutenant General Prem Nath Hoon passes away
Prem Nath Hoon - फोटो : फाइल फोटो

उनके नेतृत्व में भारतीय सेना ने सियाचिन की हड्डियां गला देने वाली ठंड के बीच पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर किया था। यह ऑपरेशन अप्रैल, 1984 में लांच किया गया था। उस वक्त भारत को अपनी खुफिया एजेंसी रॉ से खबर मिली कि 17 अप्रैल, 1984 को पाकिस्तान सेना सियाचिन ग्लेशियर में कब्जे के लिए चढ़ाई करेगी। यदि पाकिस्तान इस चोटी को अपने कब्जा कर लेता तो भारतीय सेना को हराने में उसे ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती। खबर मिलने के बाद भारतीय सेना हरकत में आ गई। पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए एक खास मिशन बनाया गया, जिसे नाम दिया ऑपरेशन मेघदूत।

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Lieutenant General Prem Nath Hoon passes away
Prem Nath Hoon - फोटो : फाइल फोटो

ऐसे में भारतीय सेना चार दिन पहले ही ग्लेशियर पर पहुंचकर पाकिस्तान सेना के मंसूबों पर पानी फेर देना चाहती थी। हालांकि, यह आसान नहीं था। भारतीय सेना के सामने कई चुनौतियां थीं, जिनमें सबसे अहम ऊंची पहाड़ी पर चढ़ाई करना और वो भी रात के वक्त। दूसरी तरफ भारतीय सेना के पास समय काफी कम था। उस वक्त जम्मू एवं कश्मीर के श्रीनगर में 15 कॉर्प के तत्कालीन जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल प्रेम नाथ हूण को इस ऑपरेशन की जिम्मेदारी सौंपी गई और मिशन को आगे बढ़ाया गया। 

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Lieutenant General Prem Nath Hoon passes away
Prem Nath Hoon - फोटो : फाइल फोटो

उनकी सूझबूझ और दूरदर्शिता के चलते भारतीय सैनिकों ने समय रहते वहां पर कब्जा जमाकर भारतीय झंडा फहरा दिया और माइनस 50-60 डिग्री तापमान में सैनिक डटे रहे। इस ऑपरेशन की खास बात यह थी कि भारतीय सैनिकों के पास समय बहुत कम था, ज्यादा सैनिक भी नहीं थे। उपकरणों की बेहद कमी थी। भारतीय सेना के आगे पाकिस्तान को अपने मंसूबों से पीछे हटना पड़ा और इसी का नतीजा है कि आज भी इस चोटी पर भारत का कब्जा है। 

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