हरियाणा के करनाल स्थित कर्णलेक पर दिल्ली कूच करने वाले किसानों को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने बुधवार की शाम को ही नाकाबंदी कर ली थी। डीसी, एसपी के साथ आईजी भारती अरोड़ा भी मौके पर मुस्तैद रहीं। जैसे ही उन्हें पता चला कि समानाबाहू पार कर पंजाब के किसान शामगढ़ के नजदीक पहुंच गए हैं तो पंजाबी समुदाय से वास्ता रखने वाली आईजी ने किसानों को रोकने के लिए गुरु नाम का सहारा लिया।
किसान आंदोलन : जब आईजी ने लिया वाहेगुरु के नाम का सहारा... किसानों ने टेका माथा, कही ये बात
आधे घंटे पहले ही सड़क पर मैट बिछवा कर तीन पंक्तियों में पुलिसकर्मियों को बैठा दिया। सभी का मुंह भी उस ओर था जिस तरफ से किसानों को आना था। किसान जैसे ही पुलिस द्वारा कर्णलेक से करीब 200 मीटर आगे खड़े कराए ट्रकों के पास पहुंचे तो पुलिसकर्मियों की थाली में लंगर डलवा दिया गया। ताकि लंगर खाता देख किसान आगे ना बढ़ें, और हुआ भी वही।
समय था दोपहर करीब 12 बजकर 10 मिनट का, ऐसे में पुलिसकर्मियों को लंगर खाते देखकर किसान नेता तेजबीर के नेतृत्व में पहुंचे किसानों ने उन्हें पहले माथा टेककर नमन किया। फिर बोले, वीरों तुस्सी गुरु दा लंगर चक्खो, अस्सी बाद च गल करांगे..। आईजी के इस कार्ड से करीब डेढ़ घंटा किसान रुके रहे। इधर, एसडीएम आयुष सिन्हा और ड्यूटी मजिस्ट्रेट तहसीलदार दर्पण कांबोज किसान नेताओं की बाजू पकड़कर लंगर के लिए साथ बैठाने का प्रयास करते रहे। लेकिन किसानों ने हाथ जोड़कर यह कहते हुए मना कर दिया कि हमारे पास भी लंगर है।
सतनाम वाहेगुरु का जाप और गुरु की बाणी चलती रही...
छावनी में तब्दील पुलिस के इस नाके पर आईजी ने पहले ही से किसानों को गुरु नाम से रोकने की कोशिश की थी। सुबह से ही मूवेबल स्पीकर के सहारे गुरु बाणी चला दी गई। दिनभर ऐसे ही स्पीकरों में सतनाम वाहेगुरु और गुरु बाणी चलती रही। जिससे दहशतगर्द दिखने वाला माहौल भी गुरुद्वारे जैसा हो गया। एक तरफ गुरु बाणी चलना, दूसरी तरफ गुरु सेवकों द्वारा लंगर तैयार करना और वहां मौजूद हर शख्स को प्रसाद खिलाने का दृश्य चलता रहा। प्रदर्शन में पहुंचा पुलिसकर्मी हो या किसान या फिर कोई अन्य किसी को भी गुरु घर के सेवादारों ने भूखा नहीं रहने दिया।
वीरों तुस्सी सानू गड्डियां दी चाबियां दे दो, होर कुछ नी चाही दा...
किसान नेता तेजबीर ने पुलिसकर्मियों से हाथ जोड़कर विनती करते हुए कर्ण लेक से दूर बने नाके की दूसरी लेयर में खड़े ट्रकों की चाबियां मांगी। बोले, वीरों तुस्सी सानू गड्डियां दी चाबियां फड़ा दयो.. होर सानू कुछ नी चाहीदा.. अस्सी गड्डियां नू साइड ते कर सकिये। इधर, तहसीलदार दर्पण कांबोज ने उन्हें यह कह दिया कि ट्रकों की चाबियां जिस युवक के पास हैं, वो अभी दूर है। दो-तीन बार उन्होंने माइक से युवक को बुलाने के लिए एनाउंसमेंट भी की, लेकिन कोई नहीं आया।