पंजाब-हरियाणा का आंदोलनरत किसान लंबे संघर्ष के बाद अब दिल्ली के मुहाने पर खड़ा है। सिंघु बॉर्डर पर किसान और दिल्ली पुलिस आमने-सामने है। पुलिस किसानों को समझाने में जुटी हैं तो वहीं आंदोलनरत अन्नदाता दिल्ली जाने की जिद पर। पुलिस एक ओर जहां कार्रवाई की चेतावनी दे रही तो वहीं दूसरी ओर किसानों को समझाने का भी काम जारी है।
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सिंघु बॉर्डर।
- फोटो : अमर उजाला
इस दौरान पुलिस ने किसानों को बातचीत के लिए बुलाया। एक किसान ने कहा कि हम सभी किसान हैं और किसी के नुमाइंदे नहीं हैं। हम कृषि कानूनों के खिलाफ अपना रोष व्यक्त करने दिल्ली आए हैं। हम भी भारत के रहने वाले हैं। दिल्ली हमारी राजधानी है। हम शांति से यहां अपनी बात करने आए हैं कोई झगड़ा करने नहीं आए हैं।
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बहादुरगढ़ में किसान और पुलिस आमने सामने।
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किसान ने कहा कि झगड़ा दिल्ली और हरियाणा की पुलिस कर रही है। किसान नहीं कर रहे हैं। इस दौरान एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि क्या पुलिस लोगों से झगड़ा करने के लिए होती है। किसान ने कहा कि हमें लग रहा है। पुलिस अधिकारी ने कहा कि इस समय कोरोना चल रहा है तो किसान ने तर्क दिया कि सरकार ने हमारे गले में फंसी का फंदा डाल दिया है।
पुलिस अधिकारी ने कहा कि हुकूमत को चुनौती देने के 101 तरीके हैं। आप करिए। इस पर किसान ने अधिकारी को जवाब दिया कि आप केवल दो तरीके बता दीजिए। पुलिस ने प्रदर्शनकारी किसानों को कोरोना का तर्क दिया तो किसान ने कहा कि बिहार में अभी चुनाव तो हुए हैं।
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किसान आंदोलन।
- फोटो : अमर उजाला
किसान ने कहा कि हमें जाने दीजिए। हम जंतर-मंतर पर धरना देंगे। कोरोना के सभी निमयों को मानेंगे। हम 50 दिन से पंजाब में धरने पर बैठे रहे हैं, लोगों को कोई दिक्कत नहीं हुई है। इस दौरान पुलिस ने कहा कि अगर आप दो दिन यहां रहेंगे तो हम भी दो दिन खड़े रहेंगे। फिर पुलिस अधिकारी ने कहा कि मैं भी किसान का बेटा हूं। हमने भी खेती की है। मैंने भी भैंस चराई है। किसान के परिवार से हूं।