अमावस की रात, दो घंटे का समय, 125 कमांडो और 50 आतंकी ढेर। भारत मां के वीर सपूतों ने पाक अधिकृत कश्मीर में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया था। साल 2016 में 28-29 सितंबर की रात को हिंदुस्तान ने इस सर्जिकल स्ट्राइक से दुनिया को बता दिया था कि वो दुश्मन को उसके घर में घुसकर मारने की कूवत रखता है।
ये ऑपरेशन इतना सीक्रेट था कि इसकी जानकारी सिर्फ सात लोगों को थी। पाक अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल ऑपरेशन के लिए कमांडो को मात्र दो घंटे का समय दिया गया था। आसमान में करीब 35 हजार फुट की ऊंचाई से भारतीय वायु सेना के हेलीकाप्टर इस ऑपरेशन की निगरानी कर थे।
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Surgical Strike
- फोटो : File Photo
125 कमांडो डोगरा और बिहार रेजिमेंट के थे। दोनों रेजिमेंट से तैयार विशेष संयुक्त पैरा कमांडो ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया। कमांडो का चयन पंजाब, जम्मू, हिमाचल प्रदेश से हुआ और विशेष टीम का गठन किया गया। सुबह साढ़े चार बजे सभी कमांडो पैदल मार्ग से ही पीओके में घुसे और सफल होकर वापस आए।
28 सितंबर रात दो बजकर दस मिनट पर पुंछ से एलओसी पार कर कमांडो पाक अधिकृत कश्मीर के भिंबर, कैल क्षेत्र स्थित कैंप में पहुंचे। हमले से पहले आतंकियों के कैंप की पूरी जानकारी हासिल कर ली गई थी। आतंकी किस समय सोते हैं और कब खाना खाते हैं, इसकी जानकारी भी ली गई थी।
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सर्जिकल स्ट्राइक
- फोटो : SELF
इस सर्जिकल स्ट्राइक के समय 125 जवानों में से केवल 35 कमांडो ही कैंप के अंदर गए थे। बाकी कैंप के बाहर थे, जो ऑपरेशन को कवर कर रहे थे, ताकि बाहरी हमले से बचा जा सके। इस दौरान पाकिस्तानी सेना का ध्यान बंटाने के लिए पुंछ व उड़ी सेक्टर पर एलओसी पर फायरिंग भी की गई।