ये कौन सा 'भूत' है, जिसे महिलाओं के लंबे बालों से नफरत है? कहीं वो आपके पड़ोस में मौजूद तो नहीं जो 'मौके पर चौका' मार रहा हो?
मॉस हिस्टीरिया का उदाहरण
देशभर में महिलाओं की चोटी कटने की घटना वास्तव में मनोवैज्ञानिक रोग मॉस हिस्टीरिया का एक उदाहरण है। जिन लोगों में सुझाव ग्रहणशीलता का गुण अधिक होता है, वे लोग दूसरों की बातों में जल्दी आते हैं और इस रोग से पीड़ित हो जाते हैं।
ज्यादातर यह रोग महिलाओं को होता है। इस रोग के चलते बहुत सारे लोग एक जैसे व्यवहार या लक्षणों को ग्रहण कर लेते हैं। इससे बचने का सबसे अच्छा उपाय यही है कि इस मुद्दे पर बातचीत ही न की जाए। कुछ समय के बाद यह रोग स्वयं ही समाप्त हो जाता है। सरकार, मीडिया और लोग इसे एक सच्ची घटना के रूप में नहीं, एक रोग के रूप में समझें। -प्रो. रविंद्र पुरी, मनोवैज्ञानिक।
मकसद भय फैलाना - डॉ. राणा
प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में महिलाओं के बाल काटने की घटना को गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय के मनोवैज्ञानिक डॉ. संदीप राणा पूरी तरह से अंधविश्वास बताते हैं। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाओं के पीछे कुछ लोगों का मकसद भय या कोतूहल फैलाकर अपना मतलब निकालना होता है।
कई बार इस तरह के असामाजिक लोग भय फैलाने के बाद इलाके में चोरी की वारदात को भी अंजाम देने लगते हैं। डॉ. राणा का कहना है कि औरतों के मानसिक रूप से बीमार होने के बाद भी खुद के बाल या चोटी काटने की बहुत कम संभावना होती है। राजस्थान के बाद हरियाणा में इस तरह की घटनाओं के पीछे किसी गिरोह की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।