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प्यार करने पर कॉलेज से निकाले गए थे साहिर, पाक ने निकाला था वारंट
टीम डिजीटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 26 Oct 2016 10:16 AM IST
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सबसे कामयाब शायर-गीतकार साहिर लुधियानवी
- फोटो : File Photo
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प्यार करने पर कॉलेज से निकाले गए साहिर लुधियानवी न सिर्फ आजीवन कुंवारे रहे, ब्लकि सबसे कामयाब शायर-गीतकार भी बने। उनके जीवन की अनकहीं बातें।
सबसे कामयाब शायर-गीतकार साहिर लुधियानवी
8 मार्च 1921 में लुधियाना के एक जागीरदार घराने में जन्मे साहिर लुधियानवी के पिता बेहद अमीर थे, लेकिन मां-पिता के अलगाव के बाद उन्होंने मां के साथ गरीबी में रहना पसंद किया। लुधियाना के खालसा हाई स्कूल में साहिर ने पढ़ाई की। 1939 में कॉलेज के दिनों में वह अमृता प्रीतम से प्यार कर बैठे, लेकिन अमृता के घरवालों को ये रास नहीं आया क्योंकि एक तो साहिर मुस्लिम थे और दूसरे गरीब। बाद में अमृता के पिता के कहने पर उन्हें कालेज से निकाल दिया गया।
बाएं से साहिर लुधियानवी, यश चोपड़ा और संगीतकार रवि
- फोटो : File Photo
जीविका चलाने के लिये साहिर ने तरह तरह की छोटी-मोटी नौकरियां कीं। 1943 में साहिर लाहौर आ गये और उसी वर्ष उन्होंने अपनी पहली कविता संग्रह 'तल्खियां' छपवायी। उन्हें ख्याति प्राप्त होने लग गई। सन् 1945 में वे प्रसिद्ध उर्दू पत्र अदब-ए-लतीफ़ और शाहकार (लाहौर) के सम्पादक बने। बाद में वे द्वैमासिक पत्रिका सवेरा के भी सम्पादक बने और इस पत्रिका में उनकी किसी रचना को सरकार के विरुद्ध समझे जाने के कारण पाकिस्तान सरकार ने उनके खिलाफ वारंट जारी कर दिया।
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अमृता प्रीतम के साथ साहिर लुधियानवी
लाहौर के बाद वे कुछ समय दिल्ली रहे। उसके बाद मुंबई आ गए। फिल्म आजादी की राह पर (1949) के लिये उन्होंने पहली बार गीत लिखे। फिल्म नौजवान का गाना ठंडी हवायें लहरा के आयें ..... बहुत लोकप्रिय हुआ और आज तक है। बाद में साहिर लुधियानवी ने बाजी, प्यासा, फिर सुबह होगी, कभी कभी जैसे लोकप्रिय फिल्मों के लिये गीत लिखे। सचिनदेव बर्मन के अलावा एन. दत्ता, शंकर जयकिशन, खय्याम आदि संगीतकारों ने उनके गीतों की धुनें बनाई हैं।
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जां निसार अख़्तर के साथा साहिर लुधियानवी
फ़िल्मों के लिए लिखे उनके गानों में भी उनका व्यक्तित्व झलकता है। उन्हें यद्यपि शराब की आदत पड़ गई थी पर उन्हें शराब (मय) के प्रशंसक गीतकारों में नहीं गिना जाता है। साहिर वे पहले गीतकार थे जिन्हें अपने गानों के लिए रॉयल्टी मिलती थी। उनके प्रयास के बावजूद ही संभव हो पाया कि आकाशवाणी पर गानों के प्रसारण के समय गायक तथा संगीतकार के अतिरिक्त गीतकारों का भी उल्लेख किया जाता था। इससे पहले तक सिर्फ गायक-संगीतकार का नाम ही उद्घोषित होता था।