बाप ने सुसाइड कर ली, मां गायब है। अब दादी और तीन भाई-बहनों की हत्या के बाद टूट गई मासूम शैली, शव देखकर उसकी चींख ही निकल गई। बदहवासी में कहती है...
मेरे भाई-बहन कहां चले गए। वह घर कब लौटकर आएंगे। रक्षाबंधन पर किसे राखी बांधेंगी और भाई दूज पर किसे तिलक करुंगी। मेरे साथ लड़ाई कौन करेगा, अब मुझे डांटेगा कौन। 12 साल की मासूम शैली यह कहते-कहते बेहोश हो गई। चार सदस्यों की हत्या के बाद 75 वर्षीय राजबाला का पूरा वंश खत्म हो गया है। केवल शैली ही बची है। वो इसलिए बच गई, क्योंकि वह जीरकपुर में अपनी बुआ और फूफा के साथ रहती है और वहीं पढ़ाई कर रही है।
लोगों ने बताया कि राजबाला का दामाद फौज में उच्च पद पर तैनात है। घटना के बाद खटौली पहुंची शैली का रो-रोकर बुरा हाल था। शिकायतकर्ता सुरेश पाल ने बताया कि वह खेती का काम करता है। उसके तीन भाई और तीन बहने हैं। उनकी छोटी बहन राजबाला की शादी खटौली गांव में हुई थी। उसकी चार लड़कियां लवली, बंटी, अंजना और मंजू हैं। सभी शादीशुदा हैं।
सुरेश पाल ने बताया कि राजबाला के बेटे उपेंद्र ने वर्ष 2008 में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी, जबकि उसकी पत्नी सुधा 2008 से गायब है। वह बहन राजबाला के साथ खटौली गांव में 17 साल से रह रहा है। उपेंद्र की मौत के दो वर्ष बाद उसके जीजा राजेंद्र सिंह की बीमारी से मौत हो गई थी। भांजी लवली का लड़का विजय ज्यादातर खटौली में रहता है। वह गांव बिहटा, थाना साहा अंबाला का रहने वाला है।
शिकायत में बताया कि लवली व उसका लड़का विजय 16 नवंबर को राजबाला के घर आए थे, लेकिन शुक्रवार शाम को वह घर से चले गए थे। बहन राजबाला रोजाना की तरह 16 नवंबर को मुझे रात साढ़े सात बजे बैठका में खाना देकर आ गई थी। खाना खाकर वहीं सो गया। राजबाला अपने पोते विशाल उर्फ दीवांशु, आयुश उर्फ चुचु वा पोती ऐश्वर्या उर्फ गिनी के साथ घर पर थीं। रोज की तरह सुबह पांच बजे राजबाला जब चाय देने नहीं आई तो इंतजार करने के बाद छह बजे घर आया। घर के मुख्य गेट को काफी देर खटखटाया, लेकिन जब कोई बाहर नहीं आया। फिर वह खेतों की ओर चला गया।