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छतबीड़ जू में एंट्री के लिए बढ़ाई गई फीस, यहां रहने वालों को भी गर्मी लगती है, देखिए तस्वीरें
Mon, 27 May 2019 02:24 PM IST
खुशबू गोयल
दीपक शाही, अमर उजाला, जीरकपुर
दीपक शाही, अमर उजाला, जीरकपुर
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 27 May 2019 02:24 PM IST
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छतबीड़ जू
- फोटो : अमर उजाला
एशिया के सबसे बड़े जू में जाने के लिए अब ज्यादा पैसे देने पड़ेंगे, क्योंकि फीस बढ़ा दी गई है। यहां रहने वालों को भी गर्मी लगती है, वे भी प्यास से बेहाल होते हैं, देखिए तस्वीरें।
छतबीड़ जू
- फोटो : अमर उजाला
देश-विदेश से छतबीड़ जू में आने वाले पर्यटकों को अपनी जेब ढीली करनी पड़ेगी। जू की एंट्री फीस में 25 फीसदी बढ़ोतरी की गई है। पहले जहां 12 साल से अधिक उम्र के पर्यटकों को एंट्री फीस के एवज में महज 60 रुपये भरने पड़ते थे, अब 80 रुपये भरने पड़ रहे हैं। वहीं छोटे बच्चों की एंट्री के लिए 30 रुपये के बजाय, अब 40 रुपये वसूल किए जा रहे हैं।
छतबीड़ जू
- फोटो : अमर उजाला
साल 2018 में जू की एंट्री फीस में 18 फीसदी की बढ़ोतरी की गई थी, लेकिन इस साल अप्रैल 2019 से जू की एंट्री फीस में सीधा 25 फीसदी बढ़ोतरी कर दी गई है। हालांकि सैलानियों को घुमाने वाली इलेक्ट्रॉनिक बैटरी कार्ट (फेरी) के किराये में इजाफा नहीं किया गया, वहीं शेर सफारी के दाम भी नहीं बढ़ाए गए हैं। इसके साथ ही तीन साल तक के बच्चे, मीडियाकर्मी और दिव्यांगों की एंट्री पहले की तरह मुफ्त रखी गई है।
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छतबीड़ जू
- फोटो : अमर उजाला
तीन साल में डबल हो गई एंट्री फीस
मार्च 2016 तक 12 साल से अधिक उम्र के सैलानियों को जू में एंट्री के लिए 40 रुपये देने पड़ते थे। वहीं प्राइमरी स्कूल के बच्चों की दस और हाई स्कूल के बच्चों की फीस बीस रुपये थी, जिसमें उसी साल दस रुपये का इजाफा किया गया था। 2016 के बाद 2018 में एंट्री फीस बढ़ाकर 50 से 60 रुपये कर दी गई। अब 20 रुपये फीस बढ़ा दी गई है।
मार्च 2016 तक 12 साल से अधिक उम्र के सैलानियों को जू में एंट्री के लिए 40 रुपये देने पड़ते थे। वहीं प्राइमरी स्कूल के बच्चों की दस और हाई स्कूल के बच्चों की फीस बीस रुपये थी, जिसमें उसी साल दस रुपये का इजाफा किया गया था। 2016 के बाद 2018 में एंट्री फीस बढ़ाकर 50 से 60 रुपये कर दी गई। अब 20 रुपये फीस बढ़ा दी गई है।
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छतबीड़ जू
- फोटो : अमर उजाला
भालू को दी जा रही फ्रूट क्रीम, बाकी जानवर पी रहे ग्लूकोन डी
इस समय पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार हो गया है। ऐसे में छतबीड़ जू में जानवर भी गर्मी से परेशान हैं। चिड़ियाघर प्रबंधन ने जानवरों को गर्मी से बचाने के लिए कई उपाय किए हैं। जानवरों के लिए जहां कूलर, तालाबों में पानी और पानी फेंकने वाले पंखों का प्रबंध किया गया है। वहीं, जानवरों के खाने में भी बदलाव किया गया है। भालू को प्रबंधन की ओर से खाने में फ्रूट क्रीम दी जा रही है तो बाकी जानवरों को ग्लूकोज और ग्लूकोन-डी पिलाया जा रहा है।
इस समय पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार हो गया है। ऐसे में छतबीड़ जू में जानवर भी गर्मी से परेशान हैं। चिड़ियाघर प्रबंधन ने जानवरों को गर्मी से बचाने के लिए कई उपाय किए हैं। जानवरों के लिए जहां कूलर, तालाबों में पानी और पानी फेंकने वाले पंखों का प्रबंध किया गया है। वहीं, जानवरों के खाने में भी बदलाव किया गया है। भालू को प्रबंधन की ओर से खाने में फ्रूट क्रीम दी जा रही है तो बाकी जानवरों को ग्लूकोज और ग्लूकोन-डी पिलाया जा रहा है।