हरियाणा के अपने कमजोर हिस्से को मजबूत करने के लिए भाजपा ने दमदार दस्तक दी है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के आगमन को मेगा शो बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई। इसके पीछे भाजपा की रणनीति है कि जाटलैंड में सबसे मजबूत होने का संदेश दिया जाएगा।
पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा का गढ़ होने के कारण कांग्रेस का भी वर्तमान में यह एक मजबूत हिस्सा है। भीड़ जुटाकर जाट लैंड में संदेश देने का प्रयास किया है कि पूर्व सीएम हुड्डा का विकल्प भाजपा है। पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में प्रदेश में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया। लोकसभा में केवल रोहतक सीट पर कांग्रेस जीती थी।
दरअसल, जाटलैंड की राजनीति को समझने के लिए तीन साल पीछे जाना पड़ेगा। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल में रोहतक का दबदबा पूरे प्रदेश में था। आलम यह था कि सरकारी कार्यालयों तक रोहतक की धमक रहती थी। इतना ही नहीं, 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले हुड्डा ने सांपला में एक जनसभा में कहा था कि आप मेरी पीढ़ पर हाथ रखना, फिर मैं किसे कै बस म्ह ना आऊं।
हुड्डा को पता था कि जाटलैंड में उनकी गहरी पकड़ है। 2014 में मोदी लहर के बावजूद हुड्डा ने जाटलैंड के तीन जिलों रोहतक, सोनीपत और झज्जर में 14 में से 10 सीट जीतकर इस बात को साबित भी कर दिया था। भाजपा केवल रोहतक, सोनीपत व बहादुरगढ़ की शहरी सीट के साथ बादली में ही जीत हासिल कर सकी।
ग्रामीण एरिया में हुड्डा के विकल्प बनने पर जोर
भाजपा की रणनीतिकार जाटलैंड में हुड्डा को घेरने के लिए यह संदेश देना चाहते हैं कि केंद्र में कांग्रेस काफी कमजोर जो चुकी है। काफी राज्यों में सत्ता से बाहर हो चुकी है। जबकि भाजपा केंद्र के साथ-साथ पूरे देश में आगे बढ़ रही है। पीएम मोदी और अमित शाह जैसे दिग्गज नेता हैं। ऐसे में हुड्डा को मजबूत करने से कोई फायदा नहीं होगा। भाजपा का साथ देने से मजबूती मिलेगी। यहीं कारण है कि अमित शाह के दौरे में पार्टी का काफी जोर रोड शो में भीड़ जुटाने पर रहा ताकि संदेश जाए कि जाटलैंड में भाजपा का जनाधार बढ़ रहा है।