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मिशन रियो पूरा, अब साक्षी मलिक के सामने कई चुनौतियां, देखिए ये रिपोर्ट

Mon, 29 Aug 2016 09:25 AM IST
मनोज कुमार मिश्र/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
मनोज कुमार मिश्र/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा) Updated Mon, 29 Aug 2016 09:25 AM IST
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after rio olympic, challanegs for wrestler sakshi malik as brand ambassador of beti bchao campaign
ओलंपिक मेडल विजेता पहलवान साक्षी मलिक - फोटो : फाइल फोटो
ब्रॉन्ज मेडल के साथ मिशन रियो ओलंपिक पूरा हो चुका है। अब पहलवान साक्षी मलिक के सामने कई चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं। देखिए ये रिपोर्ट।
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ओलंपिक मेडल विजेता पहलवान साक्षी मलिक - फोटो : फाइल फोटो
रियो ओलंपिक में पदक जीतने के बाद महिला पहलवान साक्षी मलिक के साथ ही मोखरा गांव का नाम देश-दुनिया में छा गया। खेल महाकुंभ से लौटने के बाद उनके स्वागत में मानो पूरा रोहतक शहर और गांव उमड़ पड़ा। हर किसी के जुबान पर बस यही था कि मोखरा की बेटी ने कमाल कर दिया। इससे खुश होकर मुख्यमंत्री खट्टर ने उन्हें बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का ब्रांड एंबेसडर बना दिया।
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ओलंपिक मेडल विजेता पहलवान साक्षी मलिक - फोटो : फाइल फोटो
ब्रांड एंबेसडर होने के नाते अब उन पर दारोमदार रहेगा कि कैसे प्रदेश की बेटियों को पढ़ने और उन्हें बचाने के लिए लोगों को जागरूक किया जाए। पर आंकड़े पर गौर करें तो प्रदेश के अलावा उनके खुद के गांव की स्थिति चिंताजनक है। 2011 की जनगणना के अनुसार, हरियाणा का लिंगानुपात 1000 पुरुषों पर 879 और साक्षी के गांव मोखरा की स्थिति और भी खराब। वहां 1000 पुरुषों पर 834 महिलाएं।
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ओलंपिक मेडल विजेता पहलवान साक्षी मलिक - फोटो : फाइल फोटो
इसी तरह यदि महिलाओं की साक्षरता दर पर बात करें तो हालत और भी दयनीय है। राष्ट्रीय 74 और हरियाणा की 76.6 फीसदी के मुकाबले मोखरा खास गांव की साक्षरता दर सिर्फ 67.5 है। इसमें महिलाओं की साक्षरता दर तो केवल 56.7 फीसदी ही है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिस काम के लिए साक्षी मलिक को लगाया है, वह उनके लिए कितनी बड़ी चुनौती है। शायद ओलंपिक में मेडल जीतने से कम नहीं!
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साक्षी मलिक - फोटो : Getty
साक्षी ने जिस गांव की मिट्टी ने इस बार के खेल महाकुंभ में देश की लाज बचाई, उसकी हालत किसी और समस्याग्रस्त गांव से जुदा नहीं। गांव की गलियां और सड़कें गाय और भैंस की गोबर से सनी हुईं पर मकान लगभग ईंट के बने हुए। उसी रास्ते से जब सरपंच सुरेंद्र मलिक के दरवाजे पर पहुंचा तो हुक्का पीने की चौकड़ी जमी थी।
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