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48 घंटे बाद 60 फीट गहरे बोरवेल से निकले नदीम की हालत नाजुक, पर दादा ने किया बड़ा एलान
Sun, 24 Mar 2019 03:13 PM IST
खुशबू गोयल
जीतेंद्र जीत, अमर उजाला, हिसार(हरियाणा)
जीतेंद्र जीत, अमर उजाला, हिसार(हरियाणा)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sun, 24 Mar 2019 03:13 PM IST
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बोरवेल से निकाला गया नदीम
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48 घंटे बाद 60 फीट गहरे बोरवेल से निकाले गए डेढ़ वर्षीय मासूम नदीम की हालत नाजुक बनी हुई है, लेकिन दादा ने पोते को लेकर एक बड़ा एलान किया है।
बोरवेल से निकाला गया नदीम
हिसार जिले के गांव बालसमंद के बोरवेल से 48 घंटे बाद शुक्रवार शाम को निकाले गए नदीम को एक निजी अस्पताल में वेंटिलेटर पर रखा गया है। उसे आईसीयू में डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में न्यूरो न्यूट्रोलॉजिस्ट और शिशु रोग विशेषज्ञ न होने के चलते शुक्रवार आधी रात ही नदीम को हिसार के एक निजी अस्पताल में रेफर कर दिया गया था। प्रशासन ने नदीम को बोरवेल से बाहर निकालने के बाद घटनास्थल से 55 किलोमीटर दूर अग्रोहा मेडिकल कॉलेज भेजा था, लेकिन वहां उसे इलाज के लिए अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पाई। करीब छह घंटे बाद रात दो बजे उसे हिसार में ही प्राइवेट अस्पताल में रेफर करना पड़ा।
बोरवेल से निकाला गया नदीम
अग्रोहा मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. गोपाल सिंघल का तर्क है कि प्रशासन चाह रहा था कि न्यूरो न्यूट्रोलॉजिस्ट से नदीम का इलाज चले, लेकिन यहां इसकी सुविधा नहीं है। यह सुविधा हिसार स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में है। इसलिए बच्चे को बेहतर इलाज के लिए वहां रेफर किया गया। वहीं प्राइवेट अस्पताल के चिकित्सक डॉ. विवेक गुप्ता के अनुसार, नदीम पर निमोनिया का ज्यादा असर है। किडनी व अन्य अंग ठीक तरीके से काम कर रहे हैं। जब उसे होश आएगा तो उसकी स्थिति में थोड़ा सुधार होगा। उसके बाद इस बात की भी जांच की जाएगी कि घटना से बच्चे के मस्तिष्क पर कितना प्रभाव पड़ा है।
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बोरवेल से निकाला गया नदीम
मेरे पोते नदीम को सेना ने अपनी जान पर खेलकर बचाया है। देश और देशवासियों की सेवा का यह जज्बा हमारे सैनिकों में कूट-कूट कर भरा है, जिसका उदाहरण मैंने अपनी आंखों से देख लिया है। अब मैं अपने पोते नदीम को भी देश सेवा के लिए सेना में भेजूंगा। यह कहना है जिंदगी और मौत की जंग के बीच मौत को मात देकर 60 फुट गहरे बोरवेल से जिंदा निकले नदीम के दादा खुर्शीद अहमद का। वे सेना का धन्यवाद करते नहीं थक रहे हैं। अमर उजाला से विशेष बातचीत में खुर्शीद ने कहा कि उन्हें तब और भी ज्यादा खुशी होगी जब उनका पोता नदीम बड़ा होकर देश सेवा के लिए सेना में भर्ती होगा। 48 घंटों के दौरान हमें जो देखने को मिला, उससे यह पता चला है कि हमारी सेना न केवल सरहद पर अपनी जान की बाजी लगाती है, बल्कि देशवासियों की जान को बचाने के लिए भी अपनी जान जोखिम में डालने को तैयार रहती है।
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बोरवेल से निकाला गया नदीम
नदीम की हालत गंभीर है। इसलिए मैं स्वयं विशेषज्ञ चिकित्सक से काफी देर तक डिस्कस करने के बाद प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया। नदीम के इलाज का पूरा खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
- डॉ. संजय दहिया, सीएमओ, नागरिक अस्पताल, हिसार
नदीम को लाइफ सेविंग इक्यूपमेंट पर रखा गया है। ब्लड प्रेशर भी दवाओं के सहारे चलाया जा रहा है। उसकी हालत बेहद नाजुक है और 72 घंटे बाद ही वास्तविक स्थिति का पता चल पाएगा।
- डॉ. उमेश कालड़ा, डायरेक्टर, सर्वोदय अस्पताल, हिसार
- डॉ. संजय दहिया, सीएमओ, नागरिक अस्पताल, हिसार
नदीम को लाइफ सेविंग इक्यूपमेंट पर रखा गया है। ब्लड प्रेशर भी दवाओं के सहारे चलाया जा रहा है। उसकी हालत बेहद नाजुक है और 72 घंटे बाद ही वास्तविक स्थिति का पता चल पाएगा।
- डॉ. उमेश कालड़ा, डायरेक्टर, सर्वोदय अस्पताल, हिसार