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मध्य प्रदेश में नई व्यवस्था: पेंशन फाइल अटकाई तो अब तय होगी जिम्मेदारी, हर स्तर पर 5 दिन की डेडलाइन

Sun, 30 Aug 2026 06:12 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Sun, 30 Aug 2026 06:12 PM IST
सार

मध्यप्रदेश में अब सरकारी कर्मचारियों की पेंशन फाइल लंबे समय तक अटकाना आसान नहीं होगा। वित्त विभाग ने पेंशन प्रकरण के हर स्तर के लिए समय-सीमा तय कर दी है, देरी होने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी की जवाबदेही तय होगी। नई व्यवस्था में सामान्य पेंशन प्रकरण अधिकतम 15 कार्य दिवस, पुनरीक्षित पेंशन 10 दिन और वेतन निर्धारण के मामले 11 दिन में निपटाने होंगे।
 

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New system in Madhya Pradesh: Accountability to be fixed for stalled pension files; 5-day deadline at every le
वल्लभ भवन, भोपाल - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सरकारी कर्मचारी के रिटायर होने के बाद पेंशन के लिए महीनों कार्यालयों के चक्कर लगाने की स्थिति अब बदलने की तैयारी है। वित्त विभाग ने ऑनलाइन पेंशन प्रकरणों के निपटारे के लिए हर स्तर पर समय-सीमा तय कर दी है। अब फाइल क्रियेटर, वेरीफायर और एप्रूवर के स्तर पर अनिश्चित समय तक लंबित नहीं रखी जा सकेगी। तय समय में काम पूरा नहीं हुआ तो संबंधित स्तर के कर्मचारी या अधिकारी की जवाबदेही तय होगी। नई व्यवस्था के तहत सामान्य नए पेंशन प्रकरण को तीन स्तरों से गुजरना होगा। क्रियेटर, वेरीफायर और एप्रूवर हर स्तर को अधिकतम पांच कार्य दिवस दिए गए हैं। इस तरह पूरी प्रक्रिया के लिए अधिकतम 15 कार्य दिवस निर्धारित किए गए हैं। नई व्यवस्था में पेंशन फाइल के हर चरण के लिए समय तय होने से यह देखना आसान होगा कि प्रकरण किस स्तर पर पहुंचा है और कितने दिन से लंबित है। इससे जिम्मेदारी तय करने के साथ पेंशन प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने में मदद मिलेगी।
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पुनरीक्षित पेंशन के लिए सिर्फ 10 दिन
पेंशन में संशोधन या पुनरीक्षण से जुड़े मामलों में समय-सीमा और कम रखी गई है। ऐसे प्रकरण में क्रियेटर को चार, जबकि वेरीफायर और एप्रूवर को तीन-तीन कार्य दिवस में प्रक्रिया पूरी करनी होगी। यानी पूरा मामला अधिकतम 10 कार्य दिवस में निपटाना होगा। वेतन निर्धारण से जुड़े प्रकरणों के लिए कुल 11 कार्य दिवस तय किए गए हैं। इसमें क्रियेटर को पांच दिन और वेरीफायर तथा एप्रूवर को तीन-तीन दिन मिलेंगे। 
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समीक्षा में सामने आई थी फाइलों की देरी
वित्त विभाग की समीक्षा में सामने आया कि कई संभागीय और जिला कार्यालयों में ऑनलाइन पेंशन प्रकरण अलग-अलग स्तरों पर लंबे समय तक लंबित रह रहे थे। कहीं क्रियेटर स्तर पर फाइल रुकी थी तो कहीं वेरीफायर या एप्रूवर के स्तर पर। इसके चलते पेंशन स्वीकृति की प्रक्रिया में अनावश्यक समय लग रहा था। अब विभाग ने सभी स्तरों पर समय-सीमा का पालन अनिवार्य कर दिया है। इसका उद्देश्य यह भी है कि किसी फाइल में देरी होने पर यह पता लगाया जा सके कि वह किस स्तर पर रुकी और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। 

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रिटायरमेंट के बाद नहीं, पहले शुरू होगी प्रक्रिया
आगामी महीनों में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के पेंशन प्रकरणों को भी समय पर तैयार करने पर जोर दिया गया है। अग्रिम पेंशन मामलों में जरूरी कार्रवाई पहले ही पूरी करने के निर्देश हैं, ताकि कर्मचारी के रिटायर होने के बाद पेंशन शुरू होने में देरी न हो। इस व्यवस्था का सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा, जिन्हें सेवानिवृत्ति के बाद नियमित आय के रूप में पेंशन पर निर्भर रहना होता है। 

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2025 में बना था केंद्रीकृत पेंशन सेल
वित्त विभाग ने पेंशन मामलों को तेजी से निपटाने के लिए 9 जून 2025 को राज्य केन्द्रीयकृत पेंशन प्रोसेसिंग सेल (SCPPC) का गठन किया था। 1 अप्रैल 2026 से ऑनलाइन पेंशन प्रकरणों के निराकरण की नई व्यवस्था लागू की गई है। एससीपीपीसी को नई पेंशन के मामलों के साथ पुनरीक्षित पेंशन की स्वीकृति और सेवानिवृत्ति से दो साल पहले तक किए गए वेतन निर्धारण के अनुमोदन की जिम्मेदारी भी दी गई है।

 
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