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एमपी: भोपाल के व्यापारी का GST खाता हैक कर 8.09 करोड़ के 989 फर्जी बिल चढ़ाए,1.46 करोड़ की टैक्स चोरी की कोशश
Tue, 13 Oct 2026 03:38 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Tue, 13 Oct 2026 03:38 PM IST
सार
भोपाल के एक व्यापारी के जीएसटी खाते में सेंध लगाकर 8.09 करोड़ रुपये के 989 फर्जी इनवॉइस अपलोड करने और 1.46 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी की कोशिश का मामला सामने आया है। ईओडब्ल्यू ने दिल्ली के बसंत कुमार श्रीवास्तव समेत अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया है। जांच में आरोपी की फर्म से जुड़ी ई-मेल आईडी का इस्तेमाल सामने आया है।
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ईओडब्ल्यू
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भोपाल के एक व्यापारी का जीएसटी खाता हैक कर उसके नाम पर 8.09 करोड़ रुपये से अधिक के 989 फर्जी इनवॉइस अपलोड करने और करीब 1.46 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी का प्रयास करने का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की जांच में दिल्ली के बसंत कुमार श्रीवास्तव उर्फ बसंत कुमार गौर का नाम सामने आया है। आरोप है कि व्यापारी की जानकारी के बिना उसके जीएसटी खाते का पासवर्ड बदला गया, उसमें दूसरी ई-मेल आईडी और मोबाइल नंबर जोड़े गए और फरवरी 2026 का रिटर्न भी दाखिल कर दिया गया। ईओडब्ल्यू ने 13 अक्टूबर को आरोपी और अन्य के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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पासवर्ड बदला तो खाते में नहीं कर पाए लॉगिन
शिकायतकर्ता भोपाल में प्रोपराइटरशिप फर्म चलाते हैं। उनकी फर्म का जीएसटी पंजीयन 19 जून 2025 को हुआ था। शिकायत के मुताबिक, 21 फरवरी 2026 को उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर जीएसटी पोर्टल से पासवर्ड बदलने और रिटर्न दाखिल होने से संबंधित चार संदेश आए। व्यापारी ने न तो पासवर्ड बदला था और न ही कोई रिटर्न दाखिल किया था। 24 फरवरी को जब उन्होंने अपने खाते में लॉगिन करने की कोशिश की तो 'इनवैलिड यूजरनेम या पासवर्ड' का संदेश आया। वह ई-वे बिल पोर्टल पर भी अपना खाता नहीं खोल सके। इसके बाद 27 फरवरी को उन्होंने जीएसटी शिकायत पोर्टल पर शिकायत की और भोपाल स्थित जीएसटी कार्यालय की मदद से अपनी आईडी और पासवर्ड दोबारा अपडेट कराया। खाता खुलने पर पता चला कि फरवरी 2026 का GSTR-1 रिटर्न पहले ही दाखिल हो चुका था। इसमें 989 इनवॉइस अपलोड किए गए थे, जिनका कुल मूल्य 8,09,81,305 रुपये था। ये बिल सात फर्मों के नाम पर बनाए गए थे। व्यापारी ने इन फर्मों से किसी तरह का कारोबार होने से इनकार किया। उनका कहना है कि इनवॉइस उनकी फर्म ने जारी ही नहीं किए थे।
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आरोपी की फर्म से जुड़ी मिली ई-मेल आईडी
मामले की जांच के दौरान ईओडब्ल्यू ने केंद्रीय जीएसटी, राज्य कर विभाग और जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआई) से दस्तावेज जुटाए। संबंधित फर्मों को पत्र भेजे गए। ई-मेल आईडी की जानकारी के लिए गुगल इंडिया और मोबाइल नंबरों के ग्राहक विवरण के लिए दूरसंचार कंपनियों से जानकारी मांगी गई। शिकायतकर्ता के अलावा दो अन्य व्यापारियों के बयान भी दर्ज किए गए। जांच में सामने आया कि व्यापारी के जीएसटी खाते में उसकी जानकारी के बिना दो ई-मेल आईडी और एक अन्य मोबाइल नंबर जोड़ा गया था। इनमें से एक ई-मेल आईडी आरोपी की फर्म सिद्धि इंटरप्राइजेस के जीएसटी पंजीयन में भी दर्ज मिली। जांच एजेंसी के अनुसार, इस ई-मेल से जुड़े दो मोबाइल नंबरों में से एक आरोपी के नाम पर था, जबकि दूसरा बिहार के एक व्यक्ति के नाम पर जारी हुआ था। जांच में दूसरे नंबर का इस्तेमाल भी आरोपी द्वारा किए जाने की बात सामने आई।
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दूसरी फर्म के खाते में भी फर्जी क्रेडिट नोट का मामला
ईओडब्ल्यू की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पर दूसरी फर्मों के जीएसटी खातों में फर्जी क्रेडिट नोट अपलोड कर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ लेने का आरोप है। राजगढ़ जिले के ब्यावरा क्षेत्र के पचोर की एक फर्म के संचालक ने बयान में बताया कि उसकी फर्म के खाते में भी सिद्धि इंटरप्राइजेस के नाम से इसी तरह क्रेडिट नोट अपलोड किए गए थे। जांच एजेंसी के मुताबिक, फर्जी इनवॉइस के जरिए ऐसी खरीद-बिक्री दिखाई जा सकती है, जो वास्तव में हुई ही नहीं। इनके आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा किया जा सकता है। इससे सरकारी राजस्व को नुकसान होने के साथ उस व्यापारी पर भी टैक्स की देनदारी आने का खतरा रहता है, जिसके जीएसटी नंबर का दुरुपयोग किया गया हो।
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इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
ईओडब्ल्यू ने बसंत कुमार श्रीवास्तव उर्फ बसंत कुमार गौर और अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 61(2), 62 और 318(4), साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66-C और 66-D के तहत अपराध दर्ज किया है। मामले की विवेचना जारी है। जांच में फर्जी इनवॉइस से लाभ लेने वाली फर्मों और कथित फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी देखी जाएगी।
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पासवर्ड बदला तो खाते में नहीं कर पाए लॉगिन
शिकायतकर्ता भोपाल में प्रोपराइटरशिप फर्म चलाते हैं। उनकी फर्म का जीएसटी पंजीयन 19 जून 2025 को हुआ था। शिकायत के मुताबिक, 21 फरवरी 2026 को उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर जीएसटी पोर्टल से पासवर्ड बदलने और रिटर्न दाखिल होने से संबंधित चार संदेश आए। व्यापारी ने न तो पासवर्ड बदला था और न ही कोई रिटर्न दाखिल किया था। 24 फरवरी को जब उन्होंने अपने खाते में लॉगिन करने की कोशिश की तो 'इनवैलिड यूजरनेम या पासवर्ड' का संदेश आया। वह ई-वे बिल पोर्टल पर भी अपना खाता नहीं खोल सके। इसके बाद 27 फरवरी को उन्होंने जीएसटी शिकायत पोर्टल पर शिकायत की और भोपाल स्थित जीएसटी कार्यालय की मदद से अपनी आईडी और पासवर्ड दोबारा अपडेट कराया। खाता खुलने पर पता चला कि फरवरी 2026 का GSTR-1 रिटर्न पहले ही दाखिल हो चुका था। इसमें 989 इनवॉइस अपलोड किए गए थे, जिनका कुल मूल्य 8,09,81,305 रुपये था। ये बिल सात फर्मों के नाम पर बनाए गए थे। व्यापारी ने इन फर्मों से किसी तरह का कारोबार होने से इनकार किया। उनका कहना है कि इनवॉइस उनकी फर्म ने जारी ही नहीं किए थे।
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आरोपी की फर्म से जुड़ी मिली ई-मेल आईडी
मामले की जांच के दौरान ईओडब्ल्यू ने केंद्रीय जीएसटी, राज्य कर विभाग और जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआई) से दस्तावेज जुटाए। संबंधित फर्मों को पत्र भेजे गए। ई-मेल आईडी की जानकारी के लिए गुगल इंडिया और मोबाइल नंबरों के ग्राहक विवरण के लिए दूरसंचार कंपनियों से जानकारी मांगी गई। शिकायतकर्ता के अलावा दो अन्य व्यापारियों के बयान भी दर्ज किए गए। जांच में सामने आया कि व्यापारी के जीएसटी खाते में उसकी जानकारी के बिना दो ई-मेल आईडी और एक अन्य मोबाइल नंबर जोड़ा गया था। इनमें से एक ई-मेल आईडी आरोपी की फर्म सिद्धि इंटरप्राइजेस के जीएसटी पंजीयन में भी दर्ज मिली। जांच एजेंसी के अनुसार, इस ई-मेल से जुड़े दो मोबाइल नंबरों में से एक आरोपी के नाम पर था, जबकि दूसरा बिहार के एक व्यक्ति के नाम पर जारी हुआ था। जांच में दूसरे नंबर का इस्तेमाल भी आरोपी द्वारा किए जाने की बात सामने आई।
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दूसरी फर्म के खाते में भी फर्जी क्रेडिट नोट का मामला
ईओडब्ल्यू की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पर दूसरी फर्मों के जीएसटी खातों में फर्जी क्रेडिट नोट अपलोड कर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ लेने का आरोप है। राजगढ़ जिले के ब्यावरा क्षेत्र के पचोर की एक फर्म के संचालक ने बयान में बताया कि उसकी फर्म के खाते में भी सिद्धि इंटरप्राइजेस के नाम से इसी तरह क्रेडिट नोट अपलोड किए गए थे। जांच एजेंसी के मुताबिक, फर्जी इनवॉइस के जरिए ऐसी खरीद-बिक्री दिखाई जा सकती है, जो वास्तव में हुई ही नहीं। इनके आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा किया जा सकता है। इससे सरकारी राजस्व को नुकसान होने के साथ उस व्यापारी पर भी टैक्स की देनदारी आने का खतरा रहता है, जिसके जीएसटी नंबर का दुरुपयोग किया गया हो।
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इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
ईओडब्ल्यू ने बसंत कुमार श्रीवास्तव उर्फ बसंत कुमार गौर और अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 61(2), 62 और 318(4), साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66-C और 66-D के तहत अपराध दर्ज किया है। मामले की विवेचना जारी है। जांच में फर्जी इनवॉइस से लाभ लेने वाली फर्मों और कथित फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी देखी जाएगी।
