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एमपी: भोपाल में शराब ठेके की 2.75 करोड़ की एफडीआर फर्जी मिली, डिप्टी सीएम के पूर्व ओएसडी दीपम रायचूरा निलंबित
Mon, 12 Oct 2026 11:11 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Mon, 12 Oct 2026 11:11 PM IST
सार
भोपाल के शराब ठेके में 2.75 करोड़ रुपये से अधिक की ई-एफडीआर को लेकर आबकारी विभाग की जांच में अनियमितताएं सामने आने के बाद जिला आबकारी अधिकारी दीपम रायचूरा को निलंबित कर दिया गया है। बैंक ने एफडीआर जारी करने से इनकार किया था। जांच में प्रतिभूति जमा करने में देरी, निर्धारित श्रेणी में शामिल नहीं बैंक की एफडीआर स्वीकार करने और लाइसेंस हस्तांतरण में गड़बड़ी समेत सात बिंदुओं पर सवाल उठे हैं। आरोपों के बाद रायचूरा को उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने अपने ओएसडी के पद से हटा दिया था।
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दीपम रायचूरा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश में शराब ठेके से जुड़े मामले में आबकारी विभाग ने जिला आबकारी अधिकारी दीपम रायचूरा को निलंबित कर दिया है। वे उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के पूर्व ओएसडी भी रह चुके हैं। विभागीय जांच में भोपाल के शराब समूह बीपीएल/एफ-14 (पीएंडटी चौराहा) के ठेके के लिए जमा कराई गई 2.75 करोड़ रुपये से अधिक की ई-एफडीआर फर्जी पाई गई। एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने लिखित जवाब में कहा कि यह एफडीआर उसके द्वारा जारी नहीं की गई थी। जांच में लाइसेंस जारी करने और हस्तांतरण की प्रक्रिया में भी कई अनियमितताएं सामने आई हैं। यह मामला वर्ष 2024-25 का है। आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने 12 अक्टूबर को निलंबन आदेश जारी किया। आदेश के मुताबिक, दो सदस्यीय जांच दल ने मामले की जांच की थी। जांच में रायचुरा की भूमिका में प्रथम दृष्टया गंभीर अनियमितताएं पाई गईं।
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तय समय के बाद जमा हुई प्रतिभूति
जांच रिपोर्ट के अनुसार, शराब ठेके के लिए 2,75,53,535 रुपये की ई-एफडीआर जमा की गई थी। इसके साथ 20 मई 2024 की सत्यापन रिपोर्ट भी संलग्न थी। अक्टूबर 2026 में बैंक से सत्यापन कराने पर पता चला कि एफडीआर बैंक ने जारी नहीं की थी। जांच में यह भी सामने आया कि सत्यापन रिपोर्ट लाइसेंसी के ई-मेल से मिली थी और बैंक को सत्यापन के लिए भेजे गए पत्र की तामील का रिकॉर्ड नहीं था। नियमों के अनुसार, प्रतिभूति की शेष 50 प्रतिशत राशि 30 अप्रैल 2024 तक जमा करनी थी, लेकिन एफडीआर 12 मई को जमा की गई। इसके बावजूद देरी पर कार्रवाई नहीं की गई। जांच में यह भी कहा गया कि संबंधित बैंक उस समय निर्धारित नियमों के तहत प्रतिभूति स्वीकार करने के लिए मान्य श्रेणी में नहीं था।
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लाइसेंस हस्तांतरण में भी गड़बड़ी
जांच में मेसर्स मां माइंस के लाइसेंस हस्तांतरण में भी अनियमितताएं मिलीं। आवेदन 10 जुलाई 2024 को मिला था और कलेक्टर ने 27 दिसंबर 2024 को हस्तांतरण का आदेश जारी किया। जांच के अनुसार, फर्म की पंजीकृत पार्टनरशिप डीड के बिना प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। विजय सिंह के नाम से 76 लाख रुपये की बैंक गारंटी स्वीकार की गई, जबकि उपलब्ध दस्तावेजों में उन्हें फर्म का साझेदार नहीं बताया गया था। उनके व्यक्तिगत बैंक खाते के पोस्ट-डेटेड चेक भी स्वीकार किए गए।
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आरोपों के बाद ओएसडी पद से हटाया था
हजार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में आरोपी मोहित गोगिया की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने शुक्रवार को दीपम रायचूरा को अपने ओएसडी पद से हटा दिया था और जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद विभागीय जांच में सामने आई अनियमितताओं के आधार पर उन्हें निलंबित कर दिया गया। आबकारी आयुक्त के आदेश में कुल सात बिंदुओं पर गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख है। निलंबन अवधि में रायचूरा का मुख्यालय आबकारी आयुक्त कार्यालय, ग्वालियर निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। विभागीय जांच में सामने आए निष्कर्ष प्रथम दृष्टया हैं; इन्हें अपने आप में आपराधिक दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।
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तय समय के बाद जमा हुई प्रतिभूति
जांच रिपोर्ट के अनुसार, शराब ठेके के लिए 2,75,53,535 रुपये की ई-एफडीआर जमा की गई थी। इसके साथ 20 मई 2024 की सत्यापन रिपोर्ट भी संलग्न थी। अक्टूबर 2026 में बैंक से सत्यापन कराने पर पता चला कि एफडीआर बैंक ने जारी नहीं की थी। जांच में यह भी सामने आया कि सत्यापन रिपोर्ट लाइसेंसी के ई-मेल से मिली थी और बैंक को सत्यापन के लिए भेजे गए पत्र की तामील का रिकॉर्ड नहीं था। नियमों के अनुसार, प्रतिभूति की शेष 50 प्रतिशत राशि 30 अप्रैल 2024 तक जमा करनी थी, लेकिन एफडीआर 12 मई को जमा की गई। इसके बावजूद देरी पर कार्रवाई नहीं की गई। जांच में यह भी कहा गया कि संबंधित बैंक उस समय निर्धारित नियमों के तहत प्रतिभूति स्वीकार करने के लिए मान्य श्रेणी में नहीं था।
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लाइसेंस हस्तांतरण में भी गड़बड़ी
जांच में मेसर्स मां माइंस के लाइसेंस हस्तांतरण में भी अनियमितताएं मिलीं। आवेदन 10 जुलाई 2024 को मिला था और कलेक्टर ने 27 दिसंबर 2024 को हस्तांतरण का आदेश जारी किया। जांच के अनुसार, फर्म की पंजीकृत पार्टनरशिप डीड के बिना प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। विजय सिंह के नाम से 76 लाख रुपये की बैंक गारंटी स्वीकार की गई, जबकि उपलब्ध दस्तावेजों में उन्हें फर्म का साझेदार नहीं बताया गया था। उनके व्यक्तिगत बैंक खाते के पोस्ट-डेटेड चेक भी स्वीकार किए गए।
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आरोपों के बाद ओएसडी पद से हटाया था
हजार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में आरोपी मोहित गोगिया की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने शुक्रवार को दीपम रायचूरा को अपने ओएसडी पद से हटा दिया था और जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद विभागीय जांच में सामने आई अनियमितताओं के आधार पर उन्हें निलंबित कर दिया गया। आबकारी आयुक्त के आदेश में कुल सात बिंदुओं पर गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख है। निलंबन अवधि में रायचूरा का मुख्यालय आबकारी आयुक्त कार्यालय, ग्वालियर निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। विभागीय जांच में सामने आए निष्कर्ष प्रथम दृष्टया हैं; इन्हें अपने आप में आपराधिक दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।
