ये किडनैपिंग पूरी तरह से थी 'सरकारी'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विकासनगर क्षेत्र में तिरंगा लगी एंबेसडर कार में सवार लोगों ने शनिवार दोपहर एक प्रॉपर्टी डीलर और उसके दोस्त का अपहरण कर लिया। कार सवार लोगों ने झांसा देकर दोनों को बुलाया था।
पहुंचते ही गाड़ी में लादकर ओसीआर ले जाकर बंधक बना लिया। दोनों के रात तक न लौटने और रकम की मांग शुरू होने पर परिवारीजनों ने अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया।
सर्विलांस की मदद से कई घंटे तलाश के बाद पुलिस ने ओसीआर के एक फ्लैट में बंधक बने दोनों युवकों को छुड़ा लिया। साथ ही सचिवालय के रिटायर्ड वाहन चालक को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में पता चला कि प्रॉपर्टी डीलर ने रिटायर्ड वाहन चालक को जमीन की फर्जी रजिस्ट्री करा कर 5.50 लाख रुपये का चूना लगाया था।
सीओ महानगर विशाल पांडेय ने बताया कि विकासनगर निवासी मधुर श्याम विश्वकर्मा ने शनिवार रात पुलिस को अपने भाई घनश्याम के अपहरण की सूचना दी।
उसने बताया कि घनश्याम सुबह 10:30 बजे अपने दोस्त प्रमोद के बुलाने पर शहनाई गेस्टहाउस गया था।
एसटीएफ की गिरफ्त में फंसा प्रमोद
थोड़ी देर बाद फोन कर आधे घंटे में लौटने की बात कही, लेकिन दोपहर दो बजे फोन करके बताया- मैं इलाहाबाद में हूं। चिंता न करना। इसके आधा घंटा बाद मधुर श्याम ने घनश्याम को फोन किया।
कॉल रिसीव न होने पर वह प्रमोद के घर पहुंचा। वहां प्रमोद की पत्नी ने बताया कि प्रमोद ने खुद को मुसीबत में बताते हुए बैंक से 20 हजार रुपये निकालने और एक नंबर पर कॉल करने को कहा था।
इसके बाद से प्रमोद का मोबाइल व उसके द्वारा बताया मोबाइल बंद है। पत्नी से बातचीत में प्रमोद ने कहा था कि वह हजरतगंज में एसटीएफ की गिरफ्त में है।
पुलिस ने घनश्याम, प्रमोद और कुछ अन्य लोगों के मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लेने के साथ क्राइम डिटेक्शन टीम को तलाश में लगाया।
तहकीकात चल ही रही थी कि घनश्याम ने एक नंबर से भाई मधुर श्याम को फोन किया और बंधक बनाए व्यक्ति से बात कराई।
सरकारी गाड़ी में हुआ अपहरण
मधुर श्याम ने खुद को मीडियाकर्मी बताते हुए जानकारी जुटाने की कोशिश की। इस पर इनोवा सवार कुछ लोगों ने हजरतगंज इलाके में बातचीत के लिए बुलाया। घेराबंदी होते ही इनोवा सवार लोग भाग निकले।
गाड़ी के नंबर नोट करने के साथ मधुर श्याम ने पुलिस को बताया कि उस पर उत्तर प्रदेश सचिवालय लिखा था। कड़ी से कड़ी जोड़ने और लोकेशन ट्रेस करते हुए पुलिस टीम ओसीआर पहुंची।
वहां एक फ्लैट पर छापा मारकर प्रमोद और घनश्याम को मुक्त करा लिया। साथ ही इंदिरानगर के सेक्टर-9 निवासी रामगुलाम चौबे को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने अपहरण में इस्तेमाल तिरंगा लगी एंबेसडर कार भी कब्जे में ले ली है। राम गुलाम ने खुद को राज्य संपत्ति विभाग से रिटायर्ड वाहन चालक बताया।
ओसीआर के जिस फ्लैट में दोनों युवक को बंधक बनाया गया था। वह कुछ दिनों पहले तक एक दर्जा राज्यमंत्री को आवंटित था।
राज्यमंत्री के फ्लैट में बंधक बनाया
इस राज्यमंत्री के पद से हटने के बाद उन्होंने फ्लैट खाली किया तो वाहन चालक ने उस पर अपना कब्जा जमा लिया। पुलिस को पता चला कि फ्लैट में चालकों की टोली के साथ ही अराजकतत्वों का जमघट लग रहा था।
इन दो युवकों का अपहरण करने वाले रिटायर्ड चालक रामगुलाम चौबे ने खुद को पीड़ित बताते हुए पुलिस वालों से इंसाफ की गुहार लगाई।
चौबे ने बताया कि इस प्रॉपर्टी डीलर प्रमोद ने उससे आठ हजार वर्ग फीट जमीन का सौदा किया था। इस रजिस्ट्री के लिए उसे 5.50 लाख रुपए भी दिए थे।
मगर जब वो निर्माण कराने पहुंचा तो पता चला कि फर्जी रजिस्ट्री कराई गई थी। रामगुलाम ने प्रमोद से रकम का तंगादा किया मगर उसने टालमटोल करते हुए मिलना बंद कर दिया।