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Lucknow News: एप्पल के कस्टमर केयर के नाम पर भर्ती किए थे एजेंट
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लखनऊ। अमेरिकी नागरिकों को ठगने वाले फर्जी कॉल सेंटर का विभूतिखंड पुलिस ने बुधवार रात भंडाफोड़ किया था। गिरोह के मास्टरमाइंड प्रतापगढ़ के देवासर में गांव संग्रामगंज निवासी सूरज ने 35 एजेंटों को एप्पल कंपनी के कस्टमर केयर में भर्ती का झांसा देकर नौकरी पर रखा था। वह इन्हें 15 से 20 हजार रुपये महीना वेतन देता था। हिरासत में लिए गए 35 एजेंटों ने विभूतिखंड पुलिस को यह जानकारी दी है। फिलहाल इन सभी को छोड़ दिया गया है।
डीसीपी दक्षिणी डॉ. दीक्षा शर्मा ने बताया कि एजेंटों को फर्जीवाड़े की जानकारी सूरज व उसके चार सहयोगियों के गिरफ्तार होने की बाद हुई। सूरज ने इनका साक्षात्कार भी लिया था। वह इतना शातिर था कि ज्यादातर गैर जनपद और नेपाल में रहने वालों को नौकरी पर रखता था, ताकि फर्जीवाड़ा न खुले। अगर किसी को शक भी हो जाए तो उन्हें डराकर शांत कराया जा सके। एजेंटों के घर का पता और संपर्क नंबर लिया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर उनसे बात की जा सके।
म्यूल खातों की भी हो रही जांच
डीसीपी ने बताया कि जांच में पता चला कि आरोपी अमेरिकी नागरिकों से ठगी जाने वाली रकम यूएसए में ही रहने वाले गिरोह के खातों में ट्रांसफर कराते थे। फिर वे हवाला के जरिये रकम लखनऊ ट्रांसफर कर देते थे। अब तफ्तीश की जा रही है कि जो रकम सूरज खातों में लेता था, वो किसके नाम पर खोले गए थे।
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13 साल पहले छोड़ दिया था अहमदाबाद
आरोपी सूरज वर्ष 2012 में अहमदाबाद के एक कॉल सेंटर में डायलर के रूप में काम करता था। यहीं से उसने ठगी की योजना बनानी शुरू कर दी थी। फिर वह टेलीग्राम चैनल के जरिये गिरोह को ऑपेरट करने लगा। एक साल बाद उसने कॉल सेंटर की नौकरी भी छोड़ दी थी।
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डीसीपी दक्षिणी डॉ. दीक्षा शर्मा ने बताया कि एजेंटों को फर्जीवाड़े की जानकारी सूरज व उसके चार सहयोगियों के गिरफ्तार होने की बाद हुई। सूरज ने इनका साक्षात्कार भी लिया था। वह इतना शातिर था कि ज्यादातर गैर जनपद और नेपाल में रहने वालों को नौकरी पर रखता था, ताकि फर्जीवाड़ा न खुले। अगर किसी को शक भी हो जाए तो उन्हें डराकर शांत कराया जा सके। एजेंटों के घर का पता और संपर्क नंबर लिया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर उनसे बात की जा सके।
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म्यूल खातों की भी हो रही जांच
डीसीपी ने बताया कि जांच में पता चला कि आरोपी अमेरिकी नागरिकों से ठगी जाने वाली रकम यूएसए में ही रहने वाले गिरोह के खातों में ट्रांसफर कराते थे। फिर वे हवाला के जरिये रकम लखनऊ ट्रांसफर कर देते थे। अब तफ्तीश की जा रही है कि जो रकम सूरज खातों में लेता था, वो किसके नाम पर खोले गए थे।
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13 साल पहले छोड़ दिया था अहमदाबाद
आरोपी सूरज वर्ष 2012 में अहमदाबाद के एक कॉल सेंटर में डायलर के रूप में काम करता था। यहीं से उसने ठगी की योजना बनानी शुरू कर दी थी। फिर वह टेलीग्राम चैनल के जरिये गिरोह को ऑपेरट करने लगा। एक साल बाद उसने कॉल सेंटर की नौकरी भी छोड़ दी थी।