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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   The admission of Muslim students on 42 out of 50 seats became the reason for the controversy.

Jammu: 50 में से 42 सीटों पर मुस्लिम छात्रों के दाखिले बने विवाद की वजह, सीट आवंटन ने बदल दिए सियासी सुर

Wed, 07 Jan 2026 11:41 AM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Wed, 07 Jan 2026 11:41 AM IST
सार

श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस में पहले बैच की 50 एमबीबीएस सीटों में से 42 एक ही समुदाय के छात्रों को मिलने पर विवाद खड़ा हो गया, जिसे हिंदू संगठनों ने भेदभाव बताया। लगातार प्रदर्शनों, राजनीतिक दबाव और मान्यता रद्द होने की अटकलों के बीच सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा और देर रात इस मामले पर फैसला जारी किया गया।

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The admission of Muslim students on 42 out of 50 seats became the reason for the controversy.
श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस में विवाद तब खड़ा हो गया जब पहले बैच में एमबीबीएस के 50 दाखिलों में से 42 एक ही समुदाय (मुस्लिम) के छात्रों के हुए। इससे हिंदू संगठन भड़क गए। उन्होंने हिंदू छात्रों के साथ अन्याय का आरोप लगाया। कहा कि जब यह कॉलेज हिंदू भक्तों के चढ़ावे से बना है, तो इसमें किसी विशेष समुदाय के छात्रों के लिए सीटें आरक्षित नहीं होनी चाहिए।

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वहीं, कॉलेज प्रशासन और नेशनल कांफ्रेंस के नेताओं ने धार्मिक आधार पर हिंदू छात्रों के साथ किसी भी तरह के भेदभाव को नकारते हुए इसे मेरिट के आधार पर चयन बताया। पुंछ में 26 नवंबर को एक सभा में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शिक्षण संस्थानों को भी सांप्रदायिक रंग में रंगे जाने संबंधी बयान दिया, जिसने आग में घी का काम किया।
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जम्मू के तमाम संगठन इसे हिंदुओं के साथ अन्याय बताते हुए एकजुट हो गए और उन्होंने श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति का गठन कर रणनीति के तहत धरने-प्रदर्शन का सिलसिला शुरू कर दिया। 27 नवंबर को जम्मू के साथ ही उधमपुर में रैली निकालकर इस अन्याय का विरोध किया गया। इसमें हिंदू संगठनों के साथ ही तमाम व्यापारी संगठन, छात्र संगठन, राजनीतिक संगठन शामिल हुए।
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इसके बाद समिति ने लगातार जम्मू में अलग-अलग जगहों पर रैली, धरना-प्रदर्शन का सिलसिला जारी रखते हुए दबाव बनाने का काम किया। इतना ही नहीं, श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस में सीट आवंटन के खिलाफ उन्होंने राजभवन का घेराव भी किया।

इस बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी मुखर रही। स्थानीय नेताओं ने इस संबंध में शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की। गृह मंत्री अमित शाह समेत अन्य नेताओं को जम्मू की जनता की भावनाओं से अवगत कराया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी तरह का अन्याय जम्मू के छात्रों के साथ नहीं होने दिया जाएगा।

मंगलवार को भी संघर्ष समिति के लगातार चल रहे विरोध प्रदर्शन के क्रम में इसकी युवा विंग ने सचिवालय पर धरना दिया और अनियमितताओं को दूर करते हुए हिंदू छात्रों को न्याय दिए जाने की मांग की। चौतरफा दबाव पड़ते देख केंद्र की ओर से कॉलेज की मान्यता रद्द किए जाने की अटकलें लगते देख दोपहर बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के भी सुर बदल गए।

उन्होंने एक कार्यक्रम में मीडिया से बातचीत में प्रतिभावान छात्रों को निशाना बनाए जाने पर विरोध जताते हुए कॉलेज बंद करने और यहां से छात्रों को दूसरे कॉलेजों में भेजने की बात उठाई। देर रात आखिरकार इस संबंध में फैसला जारी कर दिया गया।

आक्रोश को उठने से पहले ही केंद्र सरकार ने किया शांत
हिंदू समाज के बीच उबल रहे आक्रोश को उठने से पहले ही केंद्र सरकार ने कटड़ा स्थित मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द कर शांत कर दिया। यहां प्रथम वर्ष एमबीबीएस के छात्रों को अन्य मेडिकल कॉलेज में स्थानांतरित करने की मांग बीते सप्ताह से ही उठने लगी थी। आक्रोश यहां तक था कि अगले चरण में संघर्ष समिति ने जम्मू बंद की घोषणा की थी। अंदरखाने श्राइन बोर्ड के खिलाफ आक्रोश पनप रहा था, वहीं पूरे देश में हिंदू आस्था के साथ खिलवाड़ होने की बात उठ रही थी। जिस पर सरकार को एक कड़ा फैसला लेने पर मजबूर होना पड़ा।

हिंदू संगठनों, भाजपा सहित अन्य अनुषांगिक संगठनों ने इस मुद्दे को हिंदू समाज की आस्था के साथ खिलवाड़ बताकर आंदोलन का रूप दिया। वहीं पूरे मामले में कटड़ा स्थित श्रीमाता वैष्णो देवी के चढ़ावे, दान सहित अन्य व्यवस्थाओं की देखरेख कर रहे श्राइन बोर्ड भी संदेह के घेरे में आया।

संघर्ष समिति ने श्राइन बोर्ड पर भी लगाए आरोप
संघर्ष समिति ने श्राइन बोर्ड की भूमिका पर भी सवाल उठाए। आंदोलन के उग्र स्वरों के बाद उपराज्यपाल के लोकभवन के बाहर प्रदर्शन ने इस मुद्दे पर पूरे देश में ध्यान खींचा। आंदोलन का उग्र रूप कटड़ा मेडिकल कॉलेज के बाहर भी पहुंचा। यहां पर भी संघर्ष समिति ने धरना-प्रदर्शन कर श्राइन बोर्ड को कटघरे में खड़ा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आंदोलन के केंद्र बिंदु रही संघर्ष समिति के पदाधिकारी दिल्ली तक दौड़े और स्वास्थ्य मंत्री तक ज्ञापन सौंपा।

सनातनियों को मामला गलत लगा तो मिला लक्ष्य
श्री सनातन धर्म सभा के अध्यक्ष पुरुषोत्तम दधीचि ने कहा कि सभी लोगों को यह मामला गलत लगा और उठ खड़े हुए। श्रीमाता वैष्णो देवी की कृपा से यह सफलता मिली है। इस आंदोलन को एक नया रूप देकर अंतिम लक्ष्य तक पहुंचाया है। कई वर्षों से हिंदुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ हो रहा था जो कि माता के आशीर्वाद से होने से बच गया। संघर्ष समिति पूरी सत्यनिष्ठा के साथ जुड़ी थी, जिसमें सभी मिलकर सफल हुए।

निर्माणाधीन बिल्डिंग में खोला जाए संस्कृत विश्वविद्यालय
चैंबर ऑफ कामर्स के अध्यक्ष अरुण गुप्ता ने कहा कि यह खुशी की बात है कि आंदोलन रंग लाया। जिन मुस्लिम या हिंदू छात्रों को मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिला था, उनको दूसरे किसी मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट किया जाए। कटड़ा के अंदर जो मेडिकल कॉलेज बना, वह हमारे श्राइन बोर्ड के रुपयों से बना है। हमारी आस्था से खिलवाड़ हो रहा था, वह समस्या दूर हो गई। यहां पर मेडिकल कॉलेज की जरूरत नहीं है। मेडिकल कॉलेज की निर्माणाधीन बिल्डिंग में संस्कृत विश्वविद्यालय बनाया जाए। साथ ही योगा सेंटर भी खोला जा सकता है।

यह खबर भी पढ़ें: NMC Action: रियासी के श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की अनुमति रद्द, अन्य संस्थानों में भेजे जाएंगे छात्र

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