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Jammu News: प्रेस कोर काउंसिल के संरक्षक पर लगाया दस हजार जुर्माना
Sun, 16 Feb 2025 12:55 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Sun, 16 Feb 2025 12:55 AM IST
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इंदु भूषण बाली ने 30 दिसंबर 2024 को संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर की थी याचिका
ज्यौड़ियां। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने प्रेस कोर काउंसिल के संरक्षक इंदु भूषण बाली की एसडीएच ज्यौड़ियां की निर्माणाधीन इमारत पर रोक लगाने के लिए दायर जनहित याचिका को खारिज करते हुए उन पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
इंदु भूषण बाली ने 30 दिसंबर 2024 को संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि एसडीएच ज्यौड़ियां अस्पताल की निर्माणाधीन बिल्डिंग सेना की सुरक्षा गाइडलाइंस (2011 और 2016) का उल्लंघन कर रही है। याचिकाकर्ता के अनुसार अस्पताल की इमारत सेना शिविर की बाहरी दीवार से 100 मीटर के भीतर बनाई जा रही है, जो सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक हो सकता है। 6 फरवरी 2025 को न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस याचिका को बिना गहन विचार-विमर्श के खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि यदि सेना को इस निर्माण से कोई खतरा होता, तो वह स्वयं आपत्ति जताती। अदालत ने यह भी टिप्पणी की है कि यह याचिका समय की बर्बादी है और जनहित के नाम पर बेवजह दायर की गई है। इस आधार पर याचिकाकर्ता इंदु भूषण बाली पर दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। संवाद
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ज्यौड़ियां। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने प्रेस कोर काउंसिल के संरक्षक इंदु भूषण बाली की एसडीएच ज्यौड़ियां की निर्माणाधीन इमारत पर रोक लगाने के लिए दायर जनहित याचिका को खारिज करते हुए उन पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
इंदु भूषण बाली ने 30 दिसंबर 2024 को संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि एसडीएच ज्यौड़ियां अस्पताल की निर्माणाधीन बिल्डिंग सेना की सुरक्षा गाइडलाइंस (2011 और 2016) का उल्लंघन कर रही है। याचिकाकर्ता के अनुसार अस्पताल की इमारत सेना शिविर की बाहरी दीवार से 100 मीटर के भीतर बनाई जा रही है, जो सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक हो सकता है। 6 फरवरी 2025 को न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस याचिका को बिना गहन विचार-विमर्श के खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि यदि सेना को इस निर्माण से कोई खतरा होता, तो वह स्वयं आपत्ति जताती। अदालत ने यह भी टिप्पणी की है कि यह याचिका समय की बर्बादी है और जनहित के नाम पर बेवजह दायर की गई है। इस आधार पर याचिकाकर्ता इंदु भूषण बाली पर दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। संवाद
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